शेखा झील पक्षी विहार विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए बाहें पसारेे हुए है। राजहंस से लेकर चकवा-चकवी सहित करीब 150 प्रजातियों के 20 हजार से ज्यादा परिंंदों के यहां आने का अनुमान है। झील के जलकुंभी से मुक्त होने और किनारों पर प्राकृतिक आवास के रखरखाव से यह आस जगी है।
शेखा झील में अक्तूबर महीने की गुलाबी सर्दियों की दस्तक के साथ निकटवर्ती देशों के बर्फीली इलाकों से लेकर चीन, श्रीलंका, रूस, भूटान व पोलैंड से परिंदे शेखा झील में आकर विचरण करते हैं, जिन्हें देखने के लिए दूरदराज के पक्षी प्रेमियों समेत एएमयू वाइल्ड लाइफ विभाग के छात्र-छात्राए यहां अध्ययन करने आते हैं।
ये आते हैं मेहमान परिंदे...
नेचर गाइड इशाक मोहम्मद ने बताया कि यहां पर ग्रेलेग गूज (राजहंस), बार हेडेड गूज, ब्रह्मणी सैल डक (चकवा-चकवी), रेड क्रस्टेड पोचार्ड, टफ-टफ पोचार्ड, मलार्ड, मलार्ड टील, कॉमन टील, मार्बल्ड टील, पेन्टिल, सौबलर, रेड पोचार्ड, कॉमन पोचार्ड, लाल सर, काॉमन कूट, पेलीकन, कार्मोस्ट सैलडक, व्हाइट पेलीकन, पेंटेड स्टार्क, ब्लैक हेडेड गल, गैडबाल, स्पून बिल डक, गार्गिनी समेत डेढ सौ से अधिक प्रजातियों के हजारों परिंदे यहां आते हैं।
आसमान से झील अब पूरे स्वरूप में दिखाई दे रही
क्षेत्रीय वन अधिकारी ने बताया कि लगभग 10 साल पहले झील को पूरी तरह से साफ कर तली के उथलेपन को दूर किया गया था, जिसके बाद से झील को बजट के अभाव में प्रतिवर्ष आंशिक रूप से साफ किया जाता रहा है। इस बार मंडलायुक्त संगीता सिंह व जिलाधिकारी संजीव रंजन के सहयोग से सीएसआर फंड से 13 लाख रुपये मिलने के बाद झील को साफ किया गया है। बीते वर्ष लगभग 16000 प्रवासी परिंदे यहां आए थे लेकिन इस बार परिंदों की संख्या में काफी इजाफे की उम्मीद है। आसमान से झील अब अपने पूरे स्वरूप में दिखाई दे रही है।
झील को पूरी तरह से जलकुंभी मुक्त कर दिया गया है, लेकिन झील के बाहर के क्षेत्र को प्राकृतिक बनाए रखने के लिए किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है, जिससे कि झाड़ियों में अंडे देने वाले परिंदों को भी झील में उनके अनुकूल वातावरण मिल सके। गौरव कुमार सिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी, अलीगढ़ रेंज