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Hathras News: गैर इरादतन हत्या, दो दोषियों को सात-सात वर्ष का कारावास

Fri, 07 Feb 2025 12:59 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

आरोपी खेत की सिंचाई के लिए पाइप उनके खेत में खड़ी गेहूं की फसल में डाल रहे थे। इसके लिए जब पति-पत्नी ने मना किया तो आरोपियों ने पति को नीचे गिराकर बुरी तरह से फावड़े के बैट और ईंटों से उनके पेट में कई बार प्रहार किए, जिससे उनके पेट के अंदर चोटें आईं।
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कोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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सत्र न्यायाधीश सतेंद्र कुमार के न्यायालय ने गैर इरादतन हत्या के मामले में दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए सात सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।

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थाना सादाबाद में घाटमपुर निवासी सुशीला देवी पत्नी बनवारीलाल ने 7 जनवरी 2019 को तहरीर दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके पति और वह अपने खेत पर 29 दिसंबर 2018 को शाम को करीब छह से सात बजे छुट्टा पशुओं को देखने गए थे। वहां मौजूद विमल कुमार पुत्र नाहर सिंह व मंजू देवी पत्नी भूरी सिंह निवासीगण घाटमपुर खेत की सिंचाई के लिए पाइप उनके खेत में खड़ी गेहूं की फसल में डाल रहे थे।

इसके लिए जब उनके पति बनवारीलाल व उन्होंने मना किया तो विमल कुमार व मंजू देवी ने उनके पति को नीचे गिराकर बुरी तरह से फावड़े के बैट और ईंटों से उनके पेट में कई बार प्रहार किए, जिससे उनके पेट के अंदर चोटें आईं। उनके पति बेहोश हो गए। मेरे शोर मचाने पर मौके पर लोग आ गए, जिसके बाद यह लोग उनके पति को मरा जानकर छोड़कर मौके से भाग गए।

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वह और परिवार के लोग उनके पति को बेहोशी की हालत में लेकर थाने पहुंचे। पुलिस ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए इलाज के लिए कह दिया। उन्होंने अपने पति का काफी इलाज कराया। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण छह जनवरी 2019 को उन्हें सादाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाया गया। वहां से हाथरस जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

इलाज के दौरान गंभीर चोटें आने के कारण उनके पति की मृत्यु जिला अस्पताल में सात जनवरी 2019 की सुबह हो गई। इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक ने विवेचना करते हुए न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इस मामले की सुनवाई सत्र न्यायाधीश सतेंद्र कुमार के न्यायालय में हुई। न्यायालय में दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत आरोपी विमल कुमार व मंजू देवी को दोषी करार देते हुए सात सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
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