जिले में स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) में कई प्रकार की तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पोर्टल पर 33 बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी में कई बिंदु अस्पष्ट हैं। इन बिंदुओं को समझने और सही तरीके से भरने के लिए कोई स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं है। पोर्टल पर कहीं भी हेल्पलाइन नंबर या सहायता केंद्र का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे लोग सलाह के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
लोगों का कहना है कि कई प्रश्न ऐसे हैं, जिनकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही। खासकर परिवार की परिभाषा, निवास स्थान और संपत्ति संबंधी विवरण भरने में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। यदि शुरुआत में भाषा चयन में गलती हो जाए तो उसे बाद में बदलने की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में हिंदी भाषी लोगों को अंग्रेजी में पूछे गए प्रश्नों को समझने में परेशानी हो रही है।
कई बार पोर्टल धीमा हो जाता है या बीच में ही रुक जाता है। गूगल मैप पर घर की सही लोकेशन पिन करना भी लोगों के लिए चुनौती बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की कमजोर उपलब्धता और डिजिटल जानकारी के अभाव के कारण परेशानी और बढ़ गई है। कई लोग जनसेवा केंद्रों और परिचितों की मदद लेकर किसी तरह प्रक्रिया पूरी कर पा रहे हैं।
एक रसोई-एक परिवार का नियम
जनगणना के नियमों के अनुसार एक साथ रहने वाले और एक ही रसोई में भोजन करने वाले लोगों को एक परिवार माना जाएगा। परिवार की गिनती के लिए साझा रसोई को ही मुख्य आधार बनाया गया है। वहीं मकान उसे माना जाएगा, जिसमें आंगन, सड़क या सीढ़ी से अलग स्वतंत्र मुख्य प्रवेश द्वार हो, जोकि लोगों के लिए भ्रम पैदा कर रही है।
ये हैं स्व-गणना के कुछ अहम बिंदु
- भवन विवरण : लाइन नंबर, भवन नंबर, मकान नंबर, फर्श, दीवार और छत की सामग्री, मकान का उपयोग, मकान की स्थिति, आवास दशा।
- परिवार विवरण : परिवार संख्या, कुल सदस्य, मुखिया का नाम व लिंग, सामाजिक वर्ग, मकान का स्वामित्व, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की संख्या, पेयजल स्रोत, बिजली, शौचालय, स्नान सुविधा, रसोई, गैस कनेक्शन, खाना पकाने का ईंधन, इंटरनेट, मोबाइल, कंप्यूटर, वाहन आदि।
-अन्य विवरण : घर में मुख्य अनाज, मोबाइल नंबर समेत अन्य जानकारी।
परिवार से अलग गिनती होने का डर सता रहा
नगला मया निवासी राजेंद्र सिंह ने बताया कि वह गांव से बाहर रहकर एक निजी कंपनी में काम करते हैं। दादरी में मेरा छोटा सा घर है, लेकिन उनका व बच्चों के सभी दस्तावेज गांव के हैं। अब यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि मेरी गणना वहां होगी या गांव में। वह अपने परिवार के साथ ही गणना कराना चाहते हैं। इस बारे में लेखपाल और स्थानीय अधिकारियों से पूछा, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
तकनीकी जानकारी के अभाव में गलती होने का डर
नाई का नगला निवासी कमल शर्मा ने बताया कि मोबाइल पर एप डाउनलोड तो कर लिया, लेकिन जानकारी भरते समय कई शब्द समझ नहीं आए। जितना समझा उतना नाकाफी था, कुछ प्रश्नों के अंग्रेजी में कई अर्थ निकल रहे है, भाषा भी बदलने का कोई ऑप्शन नहीं है। ऐसे में गलती होने का डर है। आवश्यकता है कि पोर्टल पर हेल्पलाइन नंबर या स्थानीय स्तर पर सहायता केंद्र बनाए जाएं तो स्व-गणना की प्रक्रिया अधिक सरल और सफल हो सकती है।
- अभी लोकल स्तर पर नंबर क्रियाशील नहीं है, जल्द ही 1855 नंबर को लोकल स्तर पर क्रियाशील किया जाएगा, ताकि लोगों की समस्या का समाधान हो सके। - स्मृति, जिला गणना अधिकारी