संवाद न्यूज एजेंसी, सहपऊ।
परिषदीय विद्यालयों के नियंत्रणाधीन भूमि एवं संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार अब परिषदीय विद्यालयों का होगा। इस आशय का आदेश अपर मुख्य सचिव ने जारी कर दिया है। सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों के नियंत्रणाधीन भूमि एवं संपत्ति अब उसी विद्यालय की होगी।
इससे आने वाली आय विद्यालय के खाते में जमा होगी। अब तक परिषदीय विद्यालयों के अधीन भूमि एवं संपत्ति ग्राम पंचायत, नगर पंचायत एवं नगर पालिका के अधीन होती थी और उससे आने वाली आय का उपयोग उनके ही द्वारा किया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। इस आशय का आदेश आने के बाद सभी ग्राम पंचायत, नगर पंचायत एवं नगर पालिका में बेचैनी फैल गई है।
कस्बे के परिषदीय विद्यालय के अंतर्गत कस्बे में बनी हुई 26 दुकानें आती हैं। जब इन दुकानदारों को परिषदीय विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने दुकानों से आने वाले वाले किराये को स्कूल के खाते में जमा कराने का पत्र भेजा तो उनमें खलबली मच गई। दुकानदारों का कहना था कि उनको यह दुकानें जिला पंचायत द्वारा 99 साल के लिए पट्टे पर दी गई हैं। प्रधानाध्यापक प्रशांत भारद्वाज ने प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश भी दुकानदारों को पढ़कर सुनाया, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि किसी ग्राम पंचायत, नगर पंचायत और नगर पालिका को परिषदीय विद्यालयों के अधीन आने वाली भूमि अथवा संपत्ति को बेचने, दान विनियम, बंधक पट्टा द्वारा अंतरित करने की शक्ति नहीं होगी।
वैसे विद्यालयों की संपत्तियों का प्रबंधन ग्राम पंचायत, नगर पालिका अथवा नगर पंचायत को हस्तांतरित हुआ है, लेकिन उन्हें यह अधिकार नहीं दिया गया है कि वह उस संपत्ति से आने वाली आय अथवा उसे किसी अन्य व्यक्ति अथवा संस्था को पट्टे आदि पर दे सकें। इधर, बीईओ वीएन दैपुरिया का कहना है कि कस्बे के परिषदीय विद्यालय के अंतर्गत आने वाली संपत्ति, जिसमें 26 दुकानें भी शामिल हैं, का किराया निर्धारण करने के लिए समिति के गठन के लिए एसडीएम सादाबाद को पत्र लिख दिया गया है। समिति गठन होने के बाद उसकी होने वाली बैठक में ही दुकानों का किराया तय किया जाएगा ।