दलित आरटीआई कार्यकर्ता अशोक कुमार निवासी राइया, सासनी को थाने में अमानवीय यातनाएं दिये जाने के मामले में एससी/एसटी आयोग ने एसपी को तलब कर लिया है। एसपी डॉ. एस चन्नप्पा को इस मामले के सभी रिकॉर्डों के साथ 16 फरवरी को दिल्ली स्थित आयोग के कार्यालय बुलाया गया है। इस मामले में अभी तक पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज नहीं किया है।
अशोक कुमार के मुताबिक 14 दिसंबर 2014 को पड़ोसी और सासनी थाने के पूर्व चौकीदार के कहने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल समेत पांच पुलिसकर्मियों ने उन्हें गांव से पकड़ा और हवालात में बंद कर दिया। इसके बाद रात को उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं और घृणित कार्य करने को भी मजबूर किया गया। उन्हें फिर कभी आरटीआई मांगने पर एनकाउंटर की धमकी भी दी गई। अगले दिन उन्हें शांति भंग करने के आरोप में एसडीएम के समक्ष पेश किया गया। थाने में उनकी जेब से निकालकर जमा किये गए सवा चार हजार रुपयों में से केवल 80 रुपये ही लौटाए गए। अशोक कुमार ने अपने साथ हुए अमानवीय बर्ताव की शिकायत मानवाधिकार आयोग, एससी/एसटी आयोग समेत तमाम आयोग और उच्चाधिकारियों को की थी, जिससे खिसियाए पुलिसकर्मियों ने कुछ दिन बाद 31 जनवरी को फिर अशोक कुमार को शांति भंग करने के आरोप में बंद कर दिया। उनकी शिकायत पर पुलिस ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है। अशोक कुमार ने पुलिस और क्षेत्र के कई माफियाओं से जान का खतरा भी जताया है।