हाथरस में हसायन के गांव बांण अब्दुलहईपुर में एक व्यक्ति के मकान की छत गिर गई। चीख-पुकार सुन मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकाला। हालांकि किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है।
जाको राखे साइयां मार सके न कोय, बाल न बांका करि सके जो जग बैरी होय यह कहावत हाथरस के एक गांव में सही साबित हुई। रात को सोते समय एक मकान की छत गिर गई। नीचे सो रहे परिवार के सभी सदस्य दब गए, पर उन्हें हल्की चोटें आईं।
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हाथरस में हसायन के गांव बांण अब्दुलहईपुर में एक व्यक्ति के मकान की छत गिर गई। चीख-पुकार सुन मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकाला। हालांकि किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है।
गांव निवासी संजय शनिवार रात पत्नी व बच्चों सहित कमरे में सो रहा था। तभी मकान की छत गिर गई। सभी मलबे में दब गए। ग्रामीणों ने सभी को मलबा हटाकर बाहर निकाला। संजय ने बताया कि उसे, पत्नी और बच्चे को हल्की चोट आई है। घटना से ग्राम पंचायत सेक्रेटरी गिरीश कुमार को अवगत करा दिया गया।