बारिश के मौसम में लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी का खतरा बढ़ गया है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान में भी इस बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट था। जिला अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीजों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि यह राहत की बात है कि जांच में अभी तक इस बीमारी का कोई केस नहीं मिला है।
जिला अस्पताल में शुक्रवार को बुखार व मांसपेशियों में दर्द की शिकायत के 200 से अधिक मरीज पहुंचे। इनमें उल्टी व पेट दर्द की समस्या वाले 32 मरीज थे, जिनकी खून की जांच कराई गई है। इस सप्ताह सोमवार से शुक्रवार तक तेज बुखार व बदन दर्द के 841 मरीज जिला अस्पताल पहुंचे हैं, जिनमें से 271 मरीजों की खून की जांच कराई गई है। फिजिशियन डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि जांच में वायरल बुखार सामने आ रहा है। पांच फीसदी मरीजों में टाइफाइड की शिकायत है।
फिजिशियन ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणु जनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से बिल्ली, कुत्ते, चूहे तथा अन्य संक्रमित जानवरों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलती है। बारिश के मौसम में इसके खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए खून की जांच में लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया से लड़ने वाली एंटी बॉडीज का पता लगाया जा रहा है, लेकिन फिलहाल कोई केस नहीं मिला है।
जिले भर में लेप्टोस्पायरोसिस समेत अन्य मौसमी संक्रामक बीमारियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि समय रहते मरीजों की पहचान कर संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। संचारी रोग नियंत्रण अभियान में भी इस बीमारी से बचाव पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य केंद्रों पर लेप्टोस्पायरोसिस के उपचार की पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं।
-डॉ. वेदप्रकाश अग्रवाल, सीएमओ
लेप्टोस्पायरोसिस से बचाव के प्रमुख उपाय
-बारिश के दौरान जलभराव वाले स्थानों में नंगे पैर चलने से बचें।
-चूहे, कुत्ते, बिल्ली एवं अन्य जानवरों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क से बचें।
-शरीर पर कोई कट या घाव हो तो उसे अच्छी तरह ढककर रखें और गंदे पानी में जाने से बचें।
-घर और आसपास साफ-सफाई रखें तथा चूहों की संख्या नियंत्रित करने के उपाय करें।
-भोजन और पीने के पानी को ढककर रखें तथा केवल स्वच्छ एवं सुरक्षित पानी का ही सेवन करें।