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Hathras News: केरोसिन की कालाबाजारी के आरोपी की निगरानी याचिका खारिज

Tue, 28 Jul 2026 01:30 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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प्रतीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
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राशन कार्ड धारकों के हक के केरोसिन (मिट्टी का तेल) की कालाबाजारी से जुड़े मामले में एडीजे (कोर्ट संख्या-5) की अदालत ने आरोपी तरुण पोद्दार की ओर से दाखिल दांडिक निगरानी याचिका को पोषणीय न मानते हुए निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने पूर्व में जारी एसीजेएम कोर्ट के प्रार्थना पत्र को खारिज करने के आदेश की पुष्टि कर दी है।
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23 मई 2018 को एसडीएम व सीओ के निर्देशन में आपूर्ति विभाग और पुलिस की टीम ने चामड़ गेट पर नई धर्मशाला के सामने चौपइया वाला नौहरा स्थित गोदामों में छापा मारा था। इस दौरान गोदामों से बड़ी मात्रा में केरोसिन बरामद किया गया था, जिसमें 12 भरे हुए ड्रम (लगभग 2,400 लीटर केरोसिन) और 28 खाली ड्रम शामिल थे।
जांच में सामने आया कि यह केरोसिन गरीबों में बांटे जाने वाले सरकारी राशन का था, जिसे कालाबाजारी के मकसद से अवैध रूप से जमा करके रखा गया था। पुलिस ने गोदाम किराये पर लेकर कालाबाजारी करने के आरोप में निक्की वार्ष्णेय, तरुण पोद्दार, नीरज चौधरी उर्फ नीरा और धीरज के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
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विवेचना के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। विचारण न्यायालय में आरोपी तरुण पोद्दार ने बरी किए जाने का प्रार्थना पत्र दिया था। उसका तर्क था कि पुलिस ने उसके तारपीन के तेल को जबरन केरोसिन बताकर चालान किया है। उसने कोई कंट्रोल ऑर्डर नहीं तोड़ा है और उस पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराएं लागू नहीं होतीं।
29 नवंबर 2025 को एसीजेएम कोर्ट ने तरुण का यह आवेदन निरस्त कर दिया था, जिसके खिलाफ उसने अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में निगरानी याचिका दायर की थी। एडीजे कोर्ट पंचम ने दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनी और पत्रावली का बारीकी से अध्ययन किया। साथ ही गवाहों का भी अवलोकन किया।
इस आधार पर अदालत ने टिप्पणी की कि आरोप तय करते समय केवल प्रथमदृष्टया मामला देखा जाता है। आरोपी द्वारा उठाए गए तथ्य साक्ष्य के स्तर पर देखे जाने योग्य हैं और विचारण के दौरान आरोपी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। अदालत ने माना कि निचली अदालत के आदेश में कोई विधिक अनियमितता या त्रुटि नहीं है। इस आदेश के साथ ही अदालत ने मूल पत्रावली वापस निचली अदालत में भेजते हुए मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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