छात्राओं के यौन शोषण के आरोपी प्रोफेसर रजनीश कुमार के जमानत प्रार्थना पत्र पर शुक्रवार को न्यायालय में केस डायरी न आने की वजह से सुनवाई नहीं हो पाई। इस मामले में मुकदमा भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में दर्ज हुआ था, जो अब भारतीय दंड संहिता की धाराओं में तरमीम हो गया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने इस मामले में संशोधन प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इसका अभियोजन पक्ष ने विरोध किया। अब न्यायालय ने जमानत पर सुनवाई के लिए छह मई की तिथि नियत की है। वर्तमान में प्रोफेसर रजनीश कुमार अलीगढ़ जिला कारागार में निरुद्ध है।
उल्लेखनीय है कि पुलिस ने प्रोफेसर रजनीश के खिलाफ लगातार दो मुकदमे दर्ज किए थे। पहला मुकदमा हाथरस गेट के उप निरीक्षक सुनील कुमार ने 13 मार्च को दर्ज कराया था, जबकि दूसरा मुकदमा 16 मार्च को पुलिस को मिले गुमनाम शिकायती पत्र के आधार पर दर्ज हुआ। इस पत्र में शिकायतकर्ता ने कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ले का पता दर्शाया और नाम गलत बताते हुए अपनी व्यथा लिखी।
अब इस मामले में आरोपी प्रोफेसर रजनीश कुमार की ओर से जमानत की अर्जी सत्र न्यायालय में दाखिल की गई है। रजनीश के प्रार्थना पत्र पर शुक्रवार को एडीजे/एफटीसी द्वितीय महेंद्र कुमार रावत के न्यायालय में सुनवाई होनी थी, लेकिन केस डायरी न आ पाने की वजह से सुनवाई नहीं हो पाई। बचाव पक्ष की तरफ से इस मामले में संशोधन प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। न्यायालय में इस मामले में बचाव व अभियोजन पक्ष में बहस हुई।