गांव मोनिया में राहुल की मौत के बाद विलाप करतीं महिलाएं। संवाद
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सोमवार शाम आठ बजे भारतीय वायुसेना की अग्निवीर भर्ती का परिणाम आया तो गांव मोनिया में खुशी का माहौल था, होता भी क्यों नहीं, ओमवरी के बड़े बेटे राहुल का चयन हो गया था। लोग बधाइयां दे रहे थे। मिठाई बांटने की तैयारी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मंगलवार सुबह राहुल की ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई। एक झटके में माता-पिता की उम्मीदें और पूरे परिवार की खुशियां चीखों में तब्दील हो गईं।
ओमवीर छोटे किसान है और साथ में कुल्फी बेचने का का काम भी करते हैं। उनके बड़े बेटे राहुल का अग्निवीर चयन हो गया। मिठाई बांटने के लिए परिवार पिता के आने का इंतजार कर रहा था, लेकिन उन्हें आने में देर हो गई, इसके बाद सुबह मिठाई बांटने का निर्णय लिया गया।
सेना की वर्दी पहनने के साथ राहुल का सपना अपने परिवार की गरीबी दूर करने का था, पिता ने बताया कि वह अक्सर अपनी मां से कहता था कि वह एक दिन सारे दुख दूर कर देगा। बड़ा होने के कारण उस पर एक छोटे भाई और तीन बहनों की जिम्मेदारी थी। बेटे के असमय चले जाने के बाद मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
पिता को याद आ रहे बेटे के आखिरी शब्द
पिता ओमवीर सिंह को बार-बार बेटे के कहे आखिरी शब्द याद आ रहे हैं। परिणाम आने के बाद राहुल ने जानकारी देते हुए उनसे कहा था कि पिताजी, अब नौकरी लग गई है, आपको खेतों में खून-पसीना बहाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कुल्फी भी बेचनी नहीं पड़ेगी। ये शब्द बताते-बताते पिता बदहवास हो रहे थे और उनका दर्द साफ झलक रहा था।
गांव में शोक और सन्नाटा
जिस मोनिया गांव के जिस घर में बधाइयां गूंज रही थी, वहां अब सिर्फ गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है। राहुल की इस असमय मृत्यु की खबर सुनते ही मोनिया ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों में भी शोक की लहर दौड़ गई है। रिश्तेदार, ग्रामीण और शुभचिंतक पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। पूर्व विधायक प्रताप चौधरी, रोहित भरंगर, पिंकू मधुर और दिनेश आदि भी परिजनों को ढांढ़स बंधाने पहुंचे।