मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जिले में 179 सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने के लिए चिह्नित किया गया था। इन सड़कों की लंबाई 1745 किलोमीटर है, लेकिन अफसोस की बात है कि अभी तक इनमें से 50 फीसदी सड़काें के ही गड्ढे भरे जा सके हैं। जिस एनएच 530 बी पर यह हादसा हुआ, उसकी सड़क निर्माणाधीन होने की वजह से जगह-जगह गड्ढे हैं। इन गड्ढों को जिम्मेदार अधिकारियों ने भरवाने की जहमत नहीं उठाई है।
सड़क में गड्ढा न होता तो नहीं जाती बेटी की जान : मुकीम
आरुषि के पिता मुकीम लोहे की अलमारी बनाने का काम करते हैं। उनके चार बच्चे थे। इनमें तीन बेटियां और एक बेटा है। एक बेटी की मौत हो गई। अब दो बेटी और एक बेटा बचा है। आरुषि की मौत से पूरा परिवार गमजदां हैं। मुकीम के छोटे भाई दानिश की शनिवार को शादी थी, लेकिन हादसे के बाद शादी की खुशियों में खलल पड़ गया। बेहद गमगीन माहौल में दानिश का निकाह पढ़ा गया। मृतका के पिता मुकीम ने कहा कि सरकार को सड़कों के गड्ढे तो समय से भरवाने चाहिए। अगर गड्ढा न होता तो शायद मेरी बेटी की जान न जाती।
सड़क में गड्ढों को लेकर संबंधित विभाग से जानकारी हासिल की जाएगी और जल्द ही गड्ढों को भरवाया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि इस हादसे के लिए किसकी लापरवाही जिम्मेदार है। संबंधित विभाग से जवाब मांगा जाएगा।-राहुल पांडेय, जिलाधिकारी।