लगातार हो रहे घने कोहरे और धूप न निकलने से सादाबाद क्षेत्र के गांव कजरौठी सहित आसपास के गांवों में आलू की फसल पर झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ रहा है। इसके कारण आलू के पौधों की पत्तियां काली पड़ने लगी हैं, पौधों की बढ़वार भी रुक गई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ रही है।
गांव कजरौठी के विकास देशवाल, साहूकार सिंह पहलवान, सोनवीर सिंह, दुर्गेंद्र, दिनेश सहित अनेक किसानों की आलू की सैकड़ों बीघा फसल इस रोग की चपेट में आ चुकी है। किसानों का कहना है कि समय रहते बताई गई दवाओं का छिड़काव करने के बावजूद रोग पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। कई किसान बार-बार दवाओं का छिड़काव कर फसल को बचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मौसम अनुकूल न होने के कारण रोग लगातार फैलता जा रहा है। किसानों के अनुसार यदि जल्द ही मौसम साफ नहीं हुआ तो पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आलू किसानों ने बताया कि लगातार कोहरा और धूप न निकलने से नमी बढ़ जाती है, जिससे यह फफूंद जनित रोग तेजी से फैलता है। समय पर नियंत्रण न होने पर पूरी फसल नष्ट हो सकती है। कजरौठी के अलावा बिसावर, कुरसंडा आदि क्षेत्रों में भी यह रोग फसलों को अपनी चपेट में ले रहा है।
झुलसा के प्रमुख लक्षण
आलू के पौधे की पत्तियों पर काले या भूरे धब्बे बन रहे हैं, जो रूई जैसी फफूंद में बदल जाते हैं। पौधे पीले पड़कर मुरझाकर सूख रहे हैं। आलू पर गहरे भूरे या बैंगनी रंग के धब्बे पड़ रहे हैं और अंदर बदबू पैदा हो रही है। जिले में 52 हजार हेक्टेयर रकबे में आलू बोया गया है।
आलू की फसल पर अचानक झुलसा रोग आ गया है। कई बार दवा का छिड़काव किया गया, लेकिन मौसम खराब होने के कारण रोग पर काबू नहीं पाया जा सका। समाधान नहीं मिला तो नुकसान उठाना पड़ेगा। -श्यामसुंदर, किसान।
खेत में हरी-भरी फसल कुछ ही दिनों में प्रभावित हो गई। पत्तियां काली पड़ रही हैं और पौधे सूखने लगे हैं। दवाइयों पर काफी खर्च हो चुका है, फिर भी राहत नहीं मिल रही है। कृषि विभाग इसकी ओर ध्यान दे। -सोनवीर, किसान।
कोहरे और नमी से झुलसा रोग फैल रहा है। फसल की बढ़त रुक गई है, जिससे पैदावार घटने की आशंका है। कृषि विभाग तुरंत निरीक्षण कर सही मार्गदर्शन दे, ताकि फसल को बचाया जा सके। -दुर्गेंद्र, किसान।
रोग से बचाव के लिए यदि समय रहते कृषि विशेषज्ञों द्वारा सही दवा और तकनीक नहीं बताई गई तो किसानों को बड़ा नुकसान होगा। जिला प्रशासन और कृषि विभाग को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए। -गजेंद्र, किसान।