लॉकडाउन के दौरान चोरी की चार मोटरसाइकिलों के साथ दो युवकों को गिरफ्तार करने के सादाबाद पुलिस के दावे पर अदालत ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) हर्ष अग्रवाल की अदालत ने पुलिस की पूरी कहानी को मनगढ़ंत बताते हुए दोनों आरोपियों पंकज और इरशाद को दोषमुक्त कर दिया।
कोर्ट ने टिप्पणी की है कि मोटरसाइकिल कोई ऐसी वस्तु नहीं, जिसे सड़क पर सब्जी की तरह आवाज लगाकर बेचा जाए।
न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट लिखा कि पुलिस ने गुडवर्क दिखाने के लिए काल्पनिक कहानी बनाई है। फैसले की प्रति पुलिस अधीक्षक को भेजने के साथ मामले में आवश्यक कार्रवाई और चारों एफआईआर की निष्पक्ष जांच की सिफारिश भी की है।
अदालत ने यह पता करने का निर्देश दिया है कि क्या वास्तव में पीड़ितों ने तहरीर दी थी या यह सब फर्जीवाड़ा था, ताकि भविष्य में पुलिस की ऐसी मनमानी की पुनरावृत्ति न हो सके।
यह था पुलिस का दावा : सादाबाद पुलिस के अनुसार, 23 अप्रैल 2020 को लॉकडाउन के दौरान एसआई डिप्टी सिंह पुलिस टीम के साथ गश्त पर थे। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने ईदगाह गेट के पास से पंकज और इरशाद नाम के दो युवकों को गिरफ्तार किया।
दोनों आरोपी चोरी की चार मोटरसाइकिलों के पास खड़े होकर इन्हें बेचने के लिए कबाड़ी (खरीदार) का इंतजार कर रहे थे। पुलिस ने मामले में धारा 379, 411 और 413 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया था।