आज से डाकविभाग पिनकोड वीक मनाएगा। इस वीक के तहत पिनकोड के प्रति विभाग ग्राहकों को जागरूक करेगा। पिनकोड के इतिहास और आज के वर्तमान युग में यह कितना प्रभावी हैै। इसके लिए जागरूक्ता जगाई जाएगी। सभी डाकघरों व उपडाकघरों के अधिकारी कर्मचारियों को इसके लिए निर्देशित भी किया जाएगा।
भारत में पिनकोड सप्ताह 15 जनवरी से 21 जनवरी तक मनाया जाएगा। हालांकि, यह हकीकत है कि सदियों से सूचना आदान प्रदान का पर्याय बना डाक विभाग आज उपेक्षा का शिकार है। वर्तमान में लोग डाक विभाग की सेवाओं के प्रति आकर्षित नहीं है।
यही नहीं नई पीढ़ी के युवा तो इन सेवाओं से बिल्कुल ही अनभिज्ञ हैं। पुराने लोग जहां अब भी डाक सेवाओं को ही विश्वसनीय मानते हैं। वहीं मोबाइल-इंटरनेट सुविधाओं के लुत्फ में खो चुकी युवा पीढ़ी में डाक विभाग की सेवाओं को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं है। हालात यह हैं कि आज इंटर और स्नातक कक्षाओं में पढ़ने वाले काफी छात्र-छात्राओं को अपने ही जनपद का पिनकोड तक नहंी मालूम है।
यह होता है पोस्टल इंडेक्स (पिनकोड)
डाक सूचक संख्या या पोस्टल इंडेक्स नंबर (पिनकोड नंबर) एक ऐसी प्रणाली है, जिसके माध्यम से किसी स्थान विशेष को एक विशिष्ट सांख्यिक पहचान प्रदान की जाती है। भारत में पिनकोड में 6 अंको की संख्या होती है। इन्हें भारतीय डाक द्वारा छांटा जाता है। पिन प्रणाली को भारत में 15 अगस्त 1972 में आरंभ किया गया था। भारत में 9 पिन क्षेत्र हैं। पिनकोड का पहल अंक भारत के क्षेत्र को दर्शाता है। पहले 2 अंक मिलकर इस क्षेत्र में उपस्थित उपक्षेत्र या डाक वृत्तों में से किसी एक डाक वृत को दर्शाते हैं। पहले तीन अंक मिलकर छंटाई/राजस्व जिले को दर्शाते हैं। जबकि अंतिम 3 अंक सुपुर्दगी करने वाले डाकखाने का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत में उत्तर प्रदेश में पिनकोड के शुरुआती दो अंक 20 से 28 तक हैं।
पिनकोड वीक मनाया जाएगा। इस सप्ताह में लोगों को जागरूक करने के लिए पिनकोड संबंधी जानकारी भी दी जाएगी। हालांकि शासन से इस वीक के संबंध में कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।
- टीपी सिंह, एएसपी डाक विभाग, हाथरस