हाथरस में बिजली संकट की समस्या को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट गया। सोमवार को हाथरस जंक्शन क्षेत्र के पांच गांवों के प्रधान व सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मथुरा रोड ओढ़पुरा स्थित अधीक्षण अभियंता (एसई) कार्यालय पहुंच गए। वहां इन लोगों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। एसई को प्रार्थना पत्र देकर शेड्यूल के अनुसार 18 घंटे विद्युत आपूर्ति मुहैया कराने की मांग की।
शहर से लेकर गांव-देहात में हो रही बिजली कटौती ने लोगों का जीना-मुहाल कर रखा है। अधिकारियों के मुताबिक शहरी क्षेत्र को 24 घंटे जबकि, ग्रामीण इलाकों को 18 घंटे विद्युत आपूर्ति मुहैया कराई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत देखी जाए तो शेड्यूल के मुताबिक बिजली नहीं आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालत ज्यादा खराब है। मात्र दो से तीन घंटे ही बिजली मिल रही है। सोमवार को हाथरस जंक्शन क्षेत्र के रुद्रपुर, चिंतापुर, त्रिलोकपुर, नगला कठा व बेरगांव के प्रधान व सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मथुरा रोड ओढ़पुरा स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पहुंचे। वहां इन लोगों ने बिजली कटौती को लेकर विद्युत विभाग के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
अधीक्षण अभियंता एमपी सिंह को प्रार्थना पत्र देते हुए कहा कि पहले इन सभी गांवों को लाखनूं फीडर से बिजली मिलती थी। उस समय स्थिति ठीक थी, लेकिन जब से इन सभी गांवों को ऐंहन फीडर से जोड़ा गया है, तब से ही बिजली संकट गहरा गया है। सबसे ज्यादा किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। फसलों के सिंचाई प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने पांचों गांवों को फिर से लाखनूं फीडर से जोड़ने की मांग की। एसई एमपी सिंह ने आश्वासन दिया कि उनकी इस मांग पर अमल किया जाएगा और जल्द ही कोई समाधान किया जाएगा। इस मौके पर नवीन, पूर्व प्रधान गौरव प्रताप सिंह, जितेंद्र सिंह, बबलू, बंटू, बनवारी लाल, चंद्रपाल सिंह, विष्णु, प्रेमपाल सिंह, रामरतन सिंह, विक्रम सिंह, राजकुमार सिंह, मनोज कुमार आदि ग्रामीण उपस्थित रहे।
पहले गांव में बिजली काफी अच्छी आती थी, लेकिन अब 24 घंटे में मुश्किल से दो से चार घंटे ही बिजली मिल रही है। इस कारण सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। -जितेंद्र, रुद्रपुर
बिजली संकट ने हाल बेहाल कर रखा है। पूरे दिन और पूरी रात बिजली के दर्शन नहीं हो रहे हैं। फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। बाजरा और धान की फसल सूखती जा रही है। -विक्रम सिंह, ग्रामीण