इस बार नेत्र संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। जिला अस्पताल में पहुंचने वाला हर तीसरा मरीज इससे पीड़ित है। बढ़ते संक्रमण के बीच उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली आंखों में डालने की दवा बाजार से गायब है।
जिले में तेजी से फैलते नेत्र संक्रमण के चलते आंखों में डालने वाली दवा की मांग 25 प्रतिशत बढ़ गई है। बढ़ती मांग के अनुरूप आपूर्ति न होने के कारण नेत्र संक्रमण में प्रयोग होने वाली कई दवा की बाजार में कमी हो गई है। कभी उमस भरी गर्मी तो कभी ठंडी हवाओं के कारण लोग नेत्र संक्रमण ( कंजक्टिवाइटिस ) के शिकार हो रहे हैं। हर उम्र के लोग नेत्र संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।
जिला अस्पताल में ही करीब 300 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। यहां उपचार के लिए आने वाले मरीजों में हर तीसरा व्यक्ति नेत्र संक्रमण का शिकार है। बाजार में इस समय बैटनीसॉल, पाइरीमॉन व सिप्लॉक्स डी आई ड्राप मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ और जिला अस्पताल के सीएमएस डाक्टर सूर्यप्रकाश का कहना है कि इन दवाओं का इस्तेमाल तत्काल राहत के लिए किया जाता है। इनमें स्टेरायड होता है, लंबे समय तक इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
बचाव के उपाय
साबुन से हाथ साफ करें, हाथों से आंखों को न छुएं।
आंख से पानी आने पर साफ कपड़े से साफ करें।
बिना चिकित्सक की सलाह से कोई दवा प्रयोग न करें।
पिछले एक सप्ताह में ही नेत्र संक्रमण में इस्तेमाल होने वाली आई ड्राप की मांग 25 प्रतिशत बढ़ गई है। दवा कंपनियां मांग के सापेक्ष आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। इससे बाजार में बैटनीसॉल, पाइरीमॉन व सिप्लॉक्स डी आई ड्राप की कमी हो गई है। इन ड्रापों के बदले इनके विकल्प मरीजों को देकर काम चालाना पड़ रहा है।
- संदीप दीपक, मेडिकल स्टोर संचालक।