सरकार से मिलने वाली धनराशि की तो ऑडिट के माध्यम से खर्च की जानकारी ले ली जाएगी, लेकिन प्रशासन की ओर से छपवाए गए कूपन का किस मद व किस तरह से पारदर्शिता के साथ खर्च हो सकेगा। इसे लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कूपन को प्रशासन किस सरकारी खर्च में दर्शाकर ऑडिट कराएगा, यह भी सवाल खड़ा हो गया है।
सात दिवसीय कार्यक्रम को भव्य बनाए जाने के लिए अधिक धनराशि की आवश्यकता पड़ रही है। इसके चलते कूपन वितरित किए गए हैं। किसी पर कोई दबाव नहीं है, अपनी इच्छा से बिक्री कर सकते हैं। कूपन का लकी ड्रा भी निकाला जाएगा। - विशाल श्रीवास्तव, जिला पर्यटन सूचना अधिकारी।
कूपन को लेकर एक बैठक के दौरान कुछ विचार-विमर्श हुआ था, लेकिन पूरी तरह से मामला संज्ञान में नहीं है। इस संबंध में पर्यटन सूचना अधिकारी ही पूरी जानकारी दे सकेंगे। - डॉ. बसंत अग्रवाल, एडीएम वित्त एवं राजस्व।