आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत अब जिला अस्पताल की दो प्रमुख ओपीडी में डिजिटल मॉड्यूल की शुरुआत कर दी गई है। इसके साथ ही लैब मॉड्यूल को भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया गया है, जिससे मरीजों को अब अपनी जांच रिपोर्ट के लिए घंटों लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार अब मरीजों की जांच रिपोर्ट सीधे उनकी आभा आईडी पर अपडेट की जा रही है। जिले में 11.67 लाख लोगों की आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। जिला अस्पताल में ऑनलाइन पर्चे मोबाइल नंबर के जरिये सीधे आभा आईडी से कनेक्ट किए जा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज कहीं भी और कभी भी अपने मोबाइल पर अपनी पुरानी रिपोर्ट देख सकेंगे। इससे न केवल कागजी रिपोर्ट खोने का डर खत्म होगा, बल्कि डॉक्टरों को भी मरीज की मेडिकल हिस्ट्री समझने में आसानी होगी।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद ओपीडी मॉड्यूल की शुरूआत ईएनटी विशेषज्ञ के कक्ष से हुई है। डाॅ. केके शर्मा की आईडी बन चुकी है, जिसके जरिये उन्होंने मरीजों को परामर्श देना शुरू कर दिया है। साथ ही पर्चे पर दी गई जांच भी सीधे लैब के पोर्टल पर पहुंच रही है, जिससे मरीज के समय की बचत हो रही है। ईएनटी के बाद अब दंत रोग विभाग में भी इस मॉड्यूल की शुरुआत हो चुकी है।
2500 मरीजों का भारी दबाव
अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक ओपीडी में रोजाना 2200 से 2500 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इतने भारी दबाव के बीच सीमित संसाधनों के साथ डिजिटल मिशन को शत-प्रतिशत लागू करना स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। शासन से एबीडीएम के लिए पांच कंप्यूटर ऑपरेटर मिलेंगे, जिसके बाद काम आसान हो जाएगा।
हमारा लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह पेपरलेस बनाना है। ओपीडी व लैब मॉड्यूल शुरू होने से मरीजों को राहत मिलेगी। ऑपरेटर्स की कमी के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है, ताकि व्यवस्था को और सुचारू बनाया जा सके।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस