प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिसावर पर मरीज की जांच करते चिकित्सक। संवाद
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखने लगा है। रविवार को जिले के 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में भी इसका प्रभाव देखने को मिला। कई स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के न पहुंचने के कारण ओपीडी सेवाएं जारी रखने के लिए कई केंद्रों पर फार्मासिस्टों को जिम्मेदारी सौंपी गई।
प्रदेशभर में आठ अक्तूबर से एनएचएम के अंतर्गत संविदा पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर हैं। जिले में भी एनएचएम संविदा कर्मियों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) और एएनएम सहित करीब 800 कर्मचारी आंदोलन में शामिल हैं। हड़ताल के शुरुआती तीन दिनों में कर्मचारियों ने सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई थी। विभाग की ओर से ड्यूटी से अनुपस्थित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर संविदा समाप्त करने की चेतावनी भी दी गई, लेकिन इसके बाद भी कर्मचारी काम पर नहीं लौटे हैं।
हड़ताल के कारण कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपस्थिति से मरीजों को परेशानी होने की आशंका थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए फार्मासिस्टों को जिम्मेदारी सौंपी, ताकि जन आरोग्य मेले में आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहें। इस दौरान कुल 811 लोगों ने स्वास्थ्य परामर्श लिया।
सोमवार को लखनऊ में धरना देंगे कर्मचारी
एनएचएम संविदा कर्मियों का आंदोलन सोमवार को और तेज होने की संभावना है। संगठन के अध्यक्ष ऋषभ गौतम ने बताया कि सोमवार को सभी कर्मचारी लखनऊ पहुंचकर धरना देंगे। इससे अस्पताल की एसएनसीयू, ओपीडी और प्रसव कक्ष की सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। जिला अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
- स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए स्थायी स्टाफ की तैनाती की जा रही है। विभाग की कोशिश है कि हड़ताल के बावजूद मरीजों को इलाज और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें। डॉ. वेदप्रकाश, सीएमओ