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लापरवाही: प्रवासी मजदूरों को नहीं दी जा रही राशन किट

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हाथरस: स्पोट्रर्स स्टेडियम में लगे शिविर में बैठे प्रवासी मजदूर। - फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले में आने वाले प्रवासी मजदूरों को कोरोना महामारी की मार के साथ साथ यहां जिला प्रशासन की उदासीनता भी झेलनी पड़ रही है। यहां जिले में शासन के आदेशों को दरकिनार कर दिया गया है। जिले में आने वाले प्रवासी मजदूरों को क्वारंटीन सेंटर से घर भेजे जाने के दौरान 15 दिन का राशन मुहैया कराने के शासन के आदेश कागजों में ही सिमट कर रह गए हैं। अन्य प्रांतों से आने वाले कामगारों को न तो आर्थिक मदद मुहैया कराई जा रही और न ही खाद्य साम्रगी का पैकेट उपलब्ध कराया जा रहा है। जबकि शासन स्तर से खाद्य साम्रगी उपलब्ध कराने के निर्देश व बजट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया गया है।
कोरोना महामारी में लॉकडाउन के दौरान अन्य प्रांतों व जिलों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए शासन स्तर से राशन किट व धनराशि मुहैया कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि क्वारंटीन सेंटर से घर जाने वाले श्रमिकों को 15 दिन का राशन मुहैया कराया जाए।यहां इन आदेशों को दरकिनार कर प्रवासी मजदूरों के हकों को दबा दिया गया है।
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प्रवासी मजदूरों को क्वारंटीन सेंटर से बिना राशन की किट दिए ही घरों को भेज दिया गया है। हालांकि प्रशासन ने अपने सरकारी आंकड़ों में लोगों को राशन की किट उपलब्ध कराना जरुर दर्शा रखा है। प्रवासी मजदूरों की मानें तो न ही उन्हें राशन किट मिली है और न ही कोई आर्थिक मदद मुहैया कराई गई है।
पूना से लौटने के बाद हमें सेंट फ्रांसिस कॉलेज में बने क्वारंटीन सेंटर में रखा गया था। वहां से 6 दिन बाद घर भेजा गया। हमें कोई भी राशन किट और आर्थिक मदद मुहैया नहीं कराई गई।
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रवि कुमार, प्रवासी मजदूर
गुजरात में एक होटल में काम करते थे। लॉकडाउन में काम खत्म हो गया। यहां आए तो प्रशासन ने सेंट फ्रांसिस में बने क्वारंटीन सेंटर में हमें व हमारे सभी लोगों को क्वारंटीन कर दिया। यहां से घर जाते समय में केवल स्वास्थ्य प्रमाण पत्र दिया। कोई राशन किट नहीं दी गई।
रामकिशन, प्रवासी मजदूर
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