मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत प्रदेश में युवाओं को रोजगार देने और छोटे उद्योग स्थापित करने में तेजी लाने की सरकार की मंशा को जिले में झटका लग रहा है। शासन से जारी नवीनतम रिपोर्ट में हाथरस टॉप-10 लापरवाही वाले जिलों की सूची में शामिल हुआ है, जिससे सरकारी तंत्र और बैंकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हुए हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि योजना के तहत प्राप्त आवेदनों को अग्रसारित करने में हाथरस का औसत समय 534 घंटे लगभग 22 दिन रहा है, जबकि यह समय सीमा केवल कुछ घंटों से लेकर अधिकतम कुछ दिनों के भीतर पूरी की जानी चाहिए। इस मामले में सिद्धार्थनगर जिला सबसे तेज पाया गया है, जहां आवेदन बेहद कम समय 54 घंटे यानी औसतन दो दिन में आगे बढ़ाए गए।
योजना के क्रियान्वयन में केवल जिला उद्योग केंद्र ही नहीं, बल्कि बैंक भी बड़ी लापरवाही बरत रहे हैं। शासन के अनुसार हाथरस में कुल 1941 आवेदन योजना के अंतर्गत स्वीकृति के लिए भेजे गए थे, जिनमें से बैंकों ने अब तक मात्र 544 युवाओं को ही ऋण उपलब्ध कराया है। बड़ी संख्या में आवेदनों को या तो अनावश्यक आपत्तियां लगाकर वापस कर दिया गया या बिना किसी स्पष्ट कारण के लंबित रखा गया।
अलीगढ़ मंडल के चार जिलों में से हाथरस का प्रदर्शन सबसे खराब दर्ज किया गया है। पूरे प्रदेश में लापरवाही वाले जिलों की सूची में अमरोहा, भदोही, फतेहपुर, बस्ती, मिर्जापुर, लखीमपुर खीरी, मुरादाबाद, बिजनौर और संभल भी शामिल हैं। इन जिलों में भी आवेदन पत्रों के अग्रसारण की प्रक्रिया बेहद धीमी पाई गई है।
योजना का उद्देश्य युवाओं को स्वावलंबी बनाना है, लेकिन रिपोर्ट यह दर्शाती है कि जब तक जमीनी कार्यप्रणाली में तेजी नहीं लाई जाएगी, तब तक युवा उद्यमियों के सपने साकार नहीं हो सकते। उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र अजलेश कुमार का कहना है कि इस रैंकिंग के बारे में पता किया जा रहा है। अगर ऐसा है तो प्रक्रिया में सुधार किया जाएगा।