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Hathras News: किसान की मेहनत पर कुदरत का कहर

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शुक्रवार की रात को हुई बारिश में मंडी समिति में सूख रही मक्का में भरे पानी को निकालता किसान। सं - फोटो : Samvad
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शुक्रवार की रात एक बजे से 3.30 बजे तक आई तेज आंधी और जबरदस्त बारिश ने किसानों की उम्मीदों को मिट्टी में मिला दिया। खेतों से मंडी तक किसान कुदरत की मार झेल रहे हैं। खेतों में मूली और लौकी की फसल बर्बाद हो गई तो मंडी में सुखाने के लिए मक्का पानी से भीग गई। बेबस और मजबूर किसान अब प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
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कृषि उत्पादन मंडी समिति के चबूतरे पर सुबह छह बजे सेहवाजपुर के किसान जितेंद्र बाल्टी से मक्का के बीच भरे पानी को बिना रुके निकाल रहे थे, साथ-साथ कुर्ते के बाजू से अपने आंसू पोंछ रहे थे। पास जाकर पूछने पर उन्होंने आंसू छिपाते हुए अपना दर्द बयां किया। कहा, मंडी में नमी वाली मक्का बिक नहीं रही थी, इसलिए सुखाने के लिए चबूतरे पर फैलाया था।
शुक्रवार देर रात आई आंधी और बारिश से मक्का ढकने के लिए लगाई गई तिरपाल हवा में तिनके की तरह उड़ गई। देखते ही देखते मंडी परिसर तालाब बन गया। आंखों के सामने सूखी हुई कई किलो मक्का पानी के तेज बहाव के साथ गंदे नालों में समा गई। जो बची उसे सूखा रहे हैं। मंडी में जितेंद्र जैसे कई किसान बारिश थमने के बाद से बाल्टियों से मक्का में भरे पानी को निकाल रहे थे। उनकी मेहनत पर पानी फिर चुका था।
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घाटे से उबरने के लिए बोई मूली, वह भी डूबी
कुदरत का यह कहर सिर्फ जितेंद्र तक सीमित नहीं था। मांगरू गांव के किसान संदीप की कहानी तो कलेजा कंपा देने वाली है। संदीप ने 40 बीघा खेत बटाई पर लेकर बड़े अरमानों से लौकी की खेती की थी। कुछ दिन पहले हुई ओलावृष्टि ने उनकी पूरी फसल तबाह कर दी, जिससे उन्हें चार लाख का नुकसान हुआ।
इस सदमे और कर्ज के बोझ से उबरने के लिए संदीप ने हिम्मत जुटाई और उसी खेत में दोबारा मूली की फसल बोई। उम्मीद थी कि इस बार नुकसान की भरपाई हो जाएगी, लेकिन महज तीन दिन पहले बोई गई यह फसल भी शुक्रवार की रात पानी में पूरी तरह जलमग्न हो गई।जब बारिश पड़नी शुरू हुई उन्हें नींद नहीं आई। सुबह चार बजे ही खेत पर पहुंच गए। पानी से लबालब खेत देख उनके होश उड़ गए। लगातार दोहरी मार झेलने वाले संदीप को अब तक पांच लाख का आर्थिक नुकसान हो चुका है और उनके सामने अब रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

बिजेंद्र के 12 बीघा खेत में सन्नाटा
इसी क्षेत्र के एक और किसान बिजेंद्र की कहानी भी अलग नहीं है। उनके 12 बीघा खेत में खड़ी लौकी और हाल ही में बोई गई मूली की फसल इस आफत की भेंट चढ़ गई। लगातार दो बार प्राकृतिक आपदा का शिकार होने से बिजेंद्र जैसे सैकड़ों किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गई हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस बार की आंधी-बारिश ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

किसानों की जुबानी, बर्बादी की दास्तान
पहले ओलावृष्टि ने मेरी 40 बीघा लौकी खत्म की। घाटे की भरपाई की उम्मीद में दोबारा मूली बोई, तो उसे भी बारिश ने लील लिया। इस दोहरी मार ने मुझे पांच लाख के कर्ज तले दबा दिया है।
-संदीप कुमार, पीड़ित किसान (मांगरू)

कुदरत ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा। पहले ओले और अब इस बारिश ने मेरी 12 बीघा लौकी और मूली की फसल को बर्बाद कर दिया है। लाखों का नुकसान हुआ है, अब सिर्फ सरकार से ही आस है।
-बिजेंद्र, पीड़ित किसान
अब मुआवजे पर टिकीं निगाहें
लगातार हो रहे इस नुकसान से परेशान किसानों ने अब जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल फसलों के सर्वे और उचित मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है। किसानों ने कहा कि पिछले पांच महीनों से लगातार कुदरत का कहर बरप रहा है। यदि प्रशासन जल्द ही मदद के लिए आगे नहीं आया तो किसान कर्ज के बोझ तले दबा रह जाएगा।
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बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान का आकलन कराया जाएगा, ताकि किसानों को जल्द से जल्द राहत दिलाई जा सके।
अतुल वत्स, डीएम।
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