फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Natural Farming: थाली में आई औषधि, 25 बीघा में उगाया औषधीय गुणों से भरपूर आलू ‘कुफरी नीलकंठ’

Sun, 17 May 2026 01:34 PM IST
Chaman Kumar Sharma प्रशांत भारती, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

फार्म पर चार प्रकार के गेहूं उगाए जा रहे हैं, जिनमें काला गेहूं और करीब 2000 वर्ष पुरानी ‘सोना मोती’ प्रजाति शामिल है। इसके अलावा शरबती गेहूं, पीली सरसों, दो किस्म की हल्दी और औषधीय गुणों से भरपूर काला नमक चावल की खेती भी की जा रही है। फल उत्पादन में अमरूद, मौसमी और अनार भी पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
जैविक काला गेहूं, जैविक आलू और जैविक हल्दी - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कोरोना महामारी के बाद जब लोगों ने सेहत और इम्युनिटी को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी, उसी समय हाथरस के एक प्रगतिशील किसान ने रसायन मुक्त खेती का संकल्प लिया। आज वही प्रयास 25 बीघा में फैले प्राकृतिक फार्म के रूप में नजर आ रहा है, जहां ‘कुफरी नीलकंठ’ नामक औषधीय गुणों से भरपूर आलू की खेती कर किसान न सिर्फ नई पहचान बना रहा है, बल्कि सेहतमंद भोजन की दिशा में भी एक मजबूत पहल पेश कर रहा है।

विज्ञापन


किसान मदन मोहन रावत ने बताया कि शुरुआती दौर में इस राह पर चलना आसान नहीं था। नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन किसान ने हिम्मत नहीं हारी। जीवामृत, गौकृपा अमृतम और वर्मीकम्पोस्ट के नियमित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरी और उत्पादन बढ़ने लगा। आज यह खेत पूरी तरह ऑर्गेनिक प्रमाणीकरण प्राप्त कर चुका है और यहां कई प्राचीन व दुर्लभ फसलें फिर से जीवंत हो उठी हैं।

जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बेहतर जैविक खेती करने वाले किसानों का प्रमाणीकरण कराया जा रहा है। इनकी पैदावार के स्टॉल लगवाकर दूसरे किसानों को भी प्रेरित किया जा रहा है।-निखिलदेव तिवारी, जिला कृषि अधिकारी

विज्ञापन

दुर्लभ फसलों का अनोखा संगम
फार्म पर चार प्रकार के गेहूं उगाए जा रहे हैं, जिनमें काला गेहूं और करीब 2000 वर्ष पुरानी ‘सोना मोती’ प्रजाति शामिल है। इसके अलावा शरबती गेहूं, पीली सरसों, दो किस्म की हल्दी और औषधीय गुणों से भरपूर काला नमक चावल की खेती भी की जा रही है। फल उत्पादन में अमरूद, मौसमी और अनार भी पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगाए जा रहे हैं।

कुफरी नीलकंठ बना खास पहचान
इन दिनों इस फार्म का सबसे बड़ा आकर्षण ‘कुफरी नीलकंठ’ आलू है, जिसे औषधीय गुणों के कारण विशेष माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह आलू सामान्य आलू की तुलना में अधिक लाभकारी है। इसमें एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड जैसे एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं और हृदय रोगों से बचाव करते हैं। कम वसा और अधिक पोटेशियम होने के कारण यह दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद है। वहीं, कम स्टार्च होने से सीमित मात्रा में यह मधुमेह रोगियों के लिए भी बेहतर विकल्प माना जाता है।

बाजार और समर्थन की कमी बनी चुनौती
मदन मोहन रावत का कहना है कि प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं। न तो कोई विशेष बाजार उपलब्ध है और न ही आर्थिक प्रोत्साहन या अनुदान मिल पा रहा है। उचित मूल्य और विपणन की कमी के कारण जैविक उत्पाद उगाने वाले किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें