दुबई से सस्ता डामर भी नहीं आ रहा
अमेरिका-इस्राइल और ईरान युद्ध से पहले दुबई और अन्य खाड़ी देशों से आयात होने वाला सस्ता डामर भी बाजार में उपलब्ध था, जिससे ठेकेदारों को राहत थी, लेकिन अब आयात पूरी तरह बंद है। बाजार में वीजी-10, वीजी-30 और वीजी-40 जैसे ग्रेड के डामर की कमी है।
कोल्ड इमल्शन की आपूर्ति भी प्रभावित
हरियाणा के पानीपत से आने वाला कोल्ड इमल्शन भी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रहा है। सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले इस पदार्थ को गर्म करने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह ठेकेदारों के लिए सुविधाजनक विकल्प माना जाता है। इसकी कमी से भी कई निर्माण व मरम्मत कार्य प्रभावित हुए हैं।
ठेकेदार बोले : पुरानी दरों पर काम करना मुश्किल
सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदार रामकुमार शर्मा ने बताया कि जब टेंडर लिए गए थे, तब डामर की कीमत लगभग आधी थी। अब अचानक दाम दोगुने हो जाने से लागत संतुलन बिगड़ गया है। पुरानी स्वीकृत दरों पर काम करना आर्थिक रूप से बेहद कठिन हो गया है, यदि जल्द संशोधित दरें तय नहीं हुईं तो कई परियोजनाएं और लटक सकती हैं।
ठेकेदार सुरेश चंद्र शर्मा का कहना है कि केवल कीमत बढ़ना ही समस्या नहीं है, बल्कि सामग्री समय पर उपलब्ध न होना भी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि मथुरा रिफाइनरी से डामर लेने के लिए आठ दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। काम शुरू भी करें तो सामग्री की अनिश्चितता के कारण मशीनें और मजदूर खाली बैठ जाते हैं, जिससे अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इन सड़कों का निर्माण रुका
| सड़क का नाम |
किलोमीटर |
कुल लागत |
| हाथरस जंक्शन-बेरगांव |
7.40 किमी |
1061.56 लाख |
| कोकना कलां-कोकना खुर्द मार्ग |
6.20 किमी |
914.60 लाख |
| सादाबाद-जलेसर-करकौली मार्ग |
04 किमी |
690.28 लाख |
| एनएच 530बी से हसायन मार्ग |
12.226 किमी |
2036.03 लाख |
| एनएच 34 से कचौरा मार्ग |
6.70 किमी |
987.96 लाख |
| सासनी-अकराबाद मार्ग |
13 किमी |
2314.78 लाख |