तीन दिन पहले हुई बारिश और सोमवार सुबह की बूंदाबांदी से जिले में सरसों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में कटी पड़ी फसल भीगने से खराब हो रही है, जिससे मंडी में सरसों की आवक घट गई है। आवक कम होने से दाम तो बढ़े हैं, लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।
मंडी समिति में गीली सरसों के भाव 5500 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 5800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं, जबकि सूखी सरसों 6,100 रुपये से बढ़कर 6,400 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। बावजूद इसके अधिकांश किसान गीली फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं, जिससे उन्हें कम दाम मिल रहे हैं।
किसानों का कहना है कि इस बार सरसों की पैदावार भी घटकर एक से डेढ़ क्विंटल प्रति बीघा रह गई है, जबकि पिछले साल यह डेढ़ से ढाई क्विंटल प्रति बीघा थी। ऐसे में उत्पादन घटने और फसल खराब होने से उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
बारिश के कारण किसान सरसों को सुखाकर मंडी नहीं ला पा रहे हैं। जो फसल आ रही है, वह अधिकतर गीली है, जिससे किसानों को बढ़े हुए दाम का पूरा फायदा नहीं मिल रहा।
-विशन कुमार, आढ़ती
मजबूरी में गीली सरसों बेचनी पड़ रही है, जिससे हमें कम कीमत मिल रही है। यदि मौसम साफ रहता तो फसल सुखाकर बेहतर दाम मिल सकते थे।
-राहुल, किसान निवासी छौंक
गेहूं व आलू की फसल भी प्रभावित
हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव फरौली, दरियापुर, छौंक, महौ, सलेमपुर, देवी नगर, कुंडा और बरवाना सहित कई गांवों में गेहूं और आलू की फसल को नुकसान पहुंचा है। देवी नगर निवासी लक्ष्मी नारायण ने बताया कि बारिश से गेहूं की फसल गिर गई है, जिससे दाना पतला और काला पड़ने की आशंका है। गांव फरौली निवासी अखिलेश कुमार ने बताया कि उनकी 35 बीघा गेहूं की फसल बारिश के चलते पूरी तरह गिर गई, जिससे भारी नुकसान हुआ है।