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Hathras News: पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज

Wed, 05 Aug 2026 02:09 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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नगर पालिका परिषद में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर प्रक्रिया में सामने आईं गंभीर वित्तीय व प्रक्रियागत अनियमितताओं पर शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शासन ने भाजपा की नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी को वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों से तत्काल प्रभाव से वंचित कर दिया है। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही नगर पालिका के गलियारों में खलबली मच गई। नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी पत्र के अनुसार पालिका अध्यक्ष की शक्तियों और कर्तव्यों का निष्पादन अब जिलाधिकारी हाथरस या उनके द्वारा नामित किसी ऐसे अधिकारी द्वारा किया जाएगा जो डिप्टी कलेक्टर रैंक से नीचे का न हो।
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नगर पालिका परिषद हाथरस के अंतर्गत 35 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इस प्रक्रिया में गंभीर धांधली और राजस्व को क्षति पहुंचाने का आरोप लगाते हुए सभासद मनीष अग्रवाल और सुनील अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की जांच के लिए उप जिलाधिकारी सदर और वरिष्ठ कोषाधिकारी की दो सदस्यीय संयुक्त जांच समिति का गठन किया गया था। जांच समिति की रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर नियमों की अनदेखी पाए जाने की पुष्टि हुई। जांच समिति के निष्कर्षों के अनुसार टेंडर में कई गंभीर खामियां और नियम विरुद्ध कार्य पाए गए।

ये मिलीं अनियमितताएं
ई-निविदा न निकालना : जनरल फाइनेंशियल रूल्स 2017 का उल्लंघन करते हुए केवल स्थानीय समाचार पत्रों के माध्यम से निविदाएं मांगी गईं जबकि ई-निविदा प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।
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बिना तकनीकी मूल्यांकन के वित्तीय बिड खोलना : निविदा शर्तों के अनुसार फर्मों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाना अनिवार्य था। बिना तकनीकी मूल्यांकन के सीधे 14 अगस्त 2024 को वित्तीय मूल्यांकन चार्ट तैयार कर दिया गया। फर्जीवाड़ा और बैक-डेटेड स्वीकृति : वित्तीय मूल्यांकन चार्ट 14 अगस्त 2024 को बना, लेकिन एल-1 फर्म (मैसर्स ब्लैक इन्फ्राटेक) को 12 अगस्त 2024 की पूर्वगामी तिथि में ही स्वीकृति प्रदान कर दी गई थी।
कागजातों की कमी के बावजूद भुगतान : संबंधित फर्म के दर प्रस्ताव प्रपत्र पत्रावली पर उपलब्ध ही नहीं थे, फिर भी उसे कार्यादेश निर्गत कर सितंबर 2024 के बिल के एवज में 22,45,810 रुपये का भुगतान कर दिया गया।

कारण बताओ नोटिस का नहीं दिया संतोषजनक जवाब
शासन द्वारा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा-48 के तहत श्वेता चौधरी को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि दिए गए अवसरों के बावजूद उन्होंने मुख्य वित्तीय व प्रशासनिक आरोपों पर कोई तथ्यात्मक प्रतिवाद या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। शासन ने माना कि अध्यक्ष द्वारा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर कदाचार कर नगर पालिका निधि को नुकसान पहुंचाया गया है। इसके बाद राज्यपाल की स्वीकृति से उप्र नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा-48(2) के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई की गई।

शासन स्तर से नगर पालिकाध्यक्ष के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज होने के संबंध में पत्र प्राप्त हो गया है। शासन के आदेश के अनुपालन में अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।-अतुल वत्स, डीएम हाथरस
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