लापता ग्राम विकास अधिकारी नागेश यादव
- फोटो : परिजन
हाथरस के सहपऊ विकास खंड में तैनात ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) नागेश यादव शनिवार को हरिद्वार के पतंजलि केंद्र में मिल गए। वह तीन दिन से लापता थे। बड़े भाई ने उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। परिवार के लोगों के साथ पुलिस भी उनकी खोजबीन में जुटी थी।
गौरतलब है नागेश यादव बुधवार को ग्राम पंचायत खोंड़ा एवं गुतहरा में मुख्य विकास अधिकारी के निरीक्षण के बाद शाम को अपने टूंडला स्थित आवास पर जाने के लिए निकले थे, लेकिन वह घर नहीं पहुंचे थे। बुधवार को उनकी बड़ी बेटी का जन्मदिन भी था। उनका मोबाइल फोन बंद आ रहा था। पत्नी ने नागेश के अन्य साथियों से उनके बारे में जानकारी की, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। वीडीओ के एकाएक लापता होने से ग्राम्य विकास विभाग में भी खलबली मच गई। विभागीय अधिकारी व कर्मचारी भी उनकी तलाश में जुट गए।
लापता होने से पहले नागेश ने दिल्ली पुलिस में तैनात अपने बड़े भाई आदेश कुमार को व्हाट्सएप नंबर पर एक संदेश दिया था, जिसमें उन्होंने ब्लाॅक में तैनात खंड विकास अधिकारी और एडीओ पंचायत पर निरीक्षण व चंदे के नाम पर पांच हजार रुपये की मांग करने और न देने पर वेतन रोकने की धमकी देने का आरोप लगाया था और इससे परेशान होकर आत्महत्या करने जाने की बात कही थी। इसके विरोध में शुक्रवार को ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों ने विकास भवन और सहपऊ ब्लॉक कार्यालय में धरना-प्रदर्शन भी किया था। परिजन और साथी कर्मचारी लगातार नागेश के साथ अनहोनी की आशंका जता रहे थे, लेकिन अब उनके सकुशल मिल जाने से सभी ने राहत की सांस ली है।
वीडीओ नागेश यादव हरिद्वार के पतंजलि केंद्र में मिले हैं। वह अपने भाई के साथ आ रहे हैं। मेरी वीडीओ और उनके भाई से मोबाइल फोन पर वार्ता हो गई है। वह मानसिक रूप से परेशान है। पहले वह अपने गांव जाएंगे, उसके बाद उनसे वार्ता कर जानकारी की जाएगी कि आखिर वह पतंजलि क्यों गए। -अमित कुमार, प्रभारी कोतवाली निरीक्षक सहपऊ
वीडीओ के आरोपों से कटघरे में विभाग
सहपऊ। लापता हुए वीडीओ के आरोपों ने ग्राम्य विकास विभाग को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। विभाग में सफाई कर्मचारी से लेकर वीडीओ, ग्राम पंचायत अधिकारियों का हर महीने ग्राम पंचायत बदलना और उनका ब्लॉक बदलना एक प्रथा बन गई है। इन लोगों के तबादले कभी डीपीआरओ, कभी पीडी तो कभी सीडीओ के स्तर से होते रहते हैं। सवाल यह है कि क्या विभागीय अधिकारी वीडीओ द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराएंगे या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।