आपदा प्रभारी अधिकारी ने शीतलहर से बचने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उनका कहना है कि मौसम विभाग द्वारा माह दिसंबर से फरवरी के मध्य सामान्य से कम तापमान होने का पूर्वानुमान जारी किया है, इसलिए एहतियात बरतना जरूरी है।
उन्होंने कहा है कि सर्दी से बचने के लिए पर्याप्त कपड़े पहनें। कपड़ों की कई परतें अधिक सहायक होती हैं। आपातकालीन आपूर्ति तैयार रखें। शीतलहर के दौरान फ्लू, नाक से खून जैसी विभिन्न बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। इस तरह के लक्षणों दिखने पर डॉक्टर से सलाह लें। सिर, गर्दन, हाथों और पैर की अंगुलियों को पर्याप्त रूप से कवर करें, क्योंकि शरीर के इन अंगों के माध्यम से शरीर को ठंडक लगने का खतरा अधिक रहता है।
ठंड से बचाव के लिए दस्ताने पहनें, क्योंकि दस्ताने ठंड से गर्मी और इंसुलेशन प्रदान करते हैं। नियमित रूप से गर्म तरल पदार्थ पीएं, क्योंकि गर्म पेय पदार्थ ठंड से लड़ने के लिए शरीर को गर्मी प्रदान करता है। बुजुर्गाें और बच्चों की देखभाल करें और अकेले रहने वाले पड़ोसियों का ख्याल रखें। उन्होंने कहा है कि शीतलहर और पाला फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। उनमें काला रतुआ, सफेद रतुआ, पछेती तुषार आदि रोग उत्पन्न होते हैं। शीतलहर के दौरान जहां भी संभव हो, हल्की और बार-बार सतही सिंचाई करें। बागवानी और बगीचों में इंटरक्रॉपिंग (अंतर फसल) खेती का उपयोग करें। पुशओं को ठंडा चारा और ठंडा पानी देने से बचें।