हाथरस। सत्य और अहिंसा के बल पर समूचे विश्व को शांति का संदेश देने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक पटल पर वे स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा के सबसे बड़े प्रतीक हैं। दुनिया के 150 देशों में जारी किए गए डाक टिकटों पर बापू की यादें आज भी जिंदा हैं।
दुनिया भर में महान विभूतियों के सम्मान में डाक टिकट जारी करने की परंपरा रही है, लेकिन विश्व के इतिहास में सबसे अधिक देशों द्वारा यदि किसी एक महापुरुष पर डाक टिकट जारी किए गए हैं, तो वह नाम केवल महात्मा गांधी का है। इसका साक्षात प्रमाण शहर के डाक टिकट संग्रहकर्ता शैलेंद्र वार्ष्णेय सराफ के संग्रह में मिलता है।
उनके संग्रह में दुनिया भर के करीब 150 देशों द्वारा महात्मा गांधी पर जारी किए गए सैकड़ों विदेशी डाक टिकट और प्रथम दिवस आवरण (फर्स्ट डे कवर) सुरक्षित हैं। शैलेंद्र सराफ को बचपन से ही डाक टिकट सहेजने का शौक था। स्कूली दिनों में जब उन्होंने गांधी जी के दर्शन और आंदोलन के बारे में पढ़ा, तो उनके मन में बापू पर जारी टिकटों को जुटाने की जिज्ञासा जाग उठी।
इसके बाद उन्होंने देश भर की डाक प्रदर्शनियों में जाकर इन्हें जुटाया। उनके संग्रह में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका, तुर्की, अफगानिस्तान, भूटान, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मिस्र, नेपाल, ग्रीस, साइप्रस, घाना और नाइजीरिया समेत कई मुल्कों के टिकट शामिल हैं। जिस ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बापू लड़े, उसी इंग्लैंड ने उनके आंदोलनों पर टिकट जारी किए। अमेरिका ने अपने टिकट पर बापू को चैंपियन ऑफ लिबर्टी लिखकर सम्मानित किया। इसके अलावा उनके पास गांधी जी के सम्मान में जारी दुर्लभ सिक्के, हुंडी और करेंसी नोट भी हैं। संवाद
थ्री-डी तकनीक वाले दुर्लभ टिकट भी संग्रह में
शैलेंद्र सराफ के संग्रह में कई ऐसे नायाब डाक टिकट और विशेष लिफाफे शामिल हैं, जो उस दौर की अत्याधुनिक छपाई और डाक कला का अद्भुत उदाहरण पेश करते हैं। इनमें कुछ विदेशी डाक टिकट ऐसे हैं, जिन पर बाकायदा 24 कैरेट सोने का पानी यानि गोल्ड प्लेटेड चढ़ा हुआ है। इसके अलावा कई देशों द्वारा जारी किए गए थ्री-डी (त्रि-आयामी) डाक टिकट और लिफाफे भी मौजूद हैं। इनकी खासियत यह है कि इन्हें एक कोण (साइड) से देखने पर कोई एक दृश्य या आकृति नजर आती है, जबकि दूसरी ओर से देखने पर महात्मा गांधी या उनसे जुड़ी दूसरी छवि उभरती है।
पाक और चीन ने जारी नहीं किया कोई टिकट
शैलेंद्र के संग्रह में एक भी ऐसा डाक टिकट या विशेष डाक लिफाफा मौजूद नहीं है, जिसे पाकिस्तान या चीन की सरकार ने जारी किया हो। इतिहास और डाक विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि इन दोनों देशों ने आज तक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की स्मृति या सम्मान में कोई आधिकारिक डाक टिकट जारी नहीं किया है।
बापू से जुड़े डाक टिकटों के अजब-गजब तथ्य
-खादी के कपड़े पर डाक टिकट : वर्ष 2011 में भारतीय डाक विभाग ने महात्मा गांधी पर 100 रुपये का एक अनूठा खादी डाक टिकट जारी किया था। खादी के धागों से तैयार यह टिकट दुनिया के सबसे नायाब टिकटों में गिना जाता है।
-ब्रिटेन में टूटा था जीवित राजपरिवार का नियम : ब्रिटिश डाक विभाग के नियमों के अनुसार डाक टिकटों पर सिर्फ ब्रिटिश राजपरिवार के सदस्यों की तस्वीर ही आ सकती थी, लेकिन वर्ष 1969 में गांधी जी की जन्मशती पर ब्रिटेन ने इस सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए पहली बार किसी विदेशी महापुरुष के रूप में बापू पर डाक टिकट जारी किया था।
-10 रुपये का सर्विस टिकट करोड़ों में : भारत में आजादी की पहली वर्षगांठ 15 अगस्त 1948 पर बापू पर पहली डाक टिकट शृंखला जारी हुई थी। इसमें सरकारी उपयोग के लिए जारी सर्विस छपा 10 रुपये का डाक टिकट आज दुनिया के सबसे दुर्लभ और महंगे टिकटों में शामिल है, जिसकी वैश्विक नीलामी करोड़ों रुपये तक में हो चुकी है।