मंडी समिति में धान की बंपर आवक से व्यवस्था चरमरा गई है। शुक्रवार को मंडी परिसर से लेकर बाहर की मुख्य सड़कों तक धान से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और लोडर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जगह की कमी के चलते किसानों ने सब्जी मंडी में भी धान के ढेर लगा दिए।
अत्यधिक भीड़ और जाम के कारण खरीद और तौल प्रभावित रही। हालात ऐसे रहे कि खरीदारों के रिक्शे तक मंडी में नहीं निकल सके। मंडी में भीड़ नियंत्रित करने के लिए सुबह से ही वाहनों को एक-एक कर प्रवेश दिया गया। खाली होने वाले ट्रैक्टरों को पिछले गेट से बाहर निकाला गया, जिससे जाम की स्थिति से निपटा जा सके।
इसके बावजूद धान की भारी आवक के कारण मंडी में जगह की कमी बनी रही। शुक्रवार को मंडी में कुल 42 हजार क्विंटल धान की खरीद दर्ज की गई। मंडी सचिव अनिल कुमार ने बताया कि किसानों की सुविधा और खरीद व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। व्यापारियों के धान का लदान और उठान तेजी से कराने के लिए 10 और 11 अक्तूबर को मंडी में किसानों के धान की आवक बंद रहेगी। इन दो दिनों में केवल व्यापारियों के माल का लदान किया जाएगा।
पंजाब और हरियाणा भेजा जा रहा धान
मंडी में जगह खाली कराने के लिए व्यापारी धान की निकासी पर जोर दे रहे हैं। मिलों के एजेंट खुली बोली लगाकर धान खरीद रहे हैं। इसके बाद धान की बोरियों को 18 टायरा ट्रकों में लादकर पंजाब और हरियाणा की चावल मिलों में भेजा जा रहा है।
हाथ से कटे धान के मिल रहे अच्छे भाव
धान की गुणवत्ता और नमी के आधार पर किसानों को अलग-अलग भाव मिल रहे हैं। हाथ से कटे धान में नमी कम होने और गुणवत्ता बेहतर रहने के कारण इसकी हाथों-हाथ बिक्री हो रही है। इसका भाव 4,000 से 4,200 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। वहीं, कंबाइन हार्वेस्टर से कटे धान में नमी अधिक होने के कारण इसके भाव 3,300 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं।