एक जनवरी की दोपहर 1.16 बजे अभिनव अपने घर से पैदल निकले थे। घर से निकलते वक्त उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि आज सिकंदराराऊ में जियो के सेंटर की विजिट करेंगे। इसके बाद जियो सेंटर के संचालक अतुल ने पार्टी देने के लिए कहा है, इसलिए रात में लौटने में देरी हो सकती है। यह कहकर अभिनव निकल लिए। बताया जा रहा है कि सिकंदराराऊ के मिश्री होटल पर करीब सात बजे तक पार्टी हुई। इस दौरान स्वीटी से अभिनव की आखिरी बात हुई। इसके बाद परिजनों सवे बात होना बंद हो गया और अपहरणकर्ताओं की कॉल आना शुरू हो गई।
20 लाख का कर लो इंतजाम, वरना नरेला से लाश उठा लेना...
अपहरणकर्ता ने अभिनव भारद्वाज की पत्नी से फोन पर कहा था कि प्रद्युम्न को कई बार फोन किया है। उसने फोन पर कहा कि मैं टिल्लू ताजपुरिया गैंग से मोंटी बात कर रहा हूं। तुम्हारे बंदे की किडनैपिंग हो चुकी है। पेमेंट का इंतजाम कर लो। हाथरस के बंदे ने किडनैपिंग दी थी। दो दिन का टाइम दे रहे रहे हैं, बंदा दिल्ली में ही है आपका। टिल्लू ताजपुरिया गैंग का नाम सुना है, यू ट्यूब पर सर्च कर लियो। मोंटी दोसो मेरा नाम है, 15 साल से जेल से फरार हूं। 20 लाख रुपये की व्यवस्था कर लो। बंदा मिल जाएगा, नहीं चाहिए तो सुबह बंदे की लाश नरेला नाले से उठा लेना। नहीं तो तुम्हारे बंदे का पार्सल भेज देते हैं। अगर पेमेंट हो सकती है तो हां कहो या न कहो। अपहरणकर्ता ने यह तक कहा कि मुझे पैसे मिल गए तो मैं यह भी बता दूंगा कि किसने किडनैपिंग दी है हमें, क्यों उठवाया गया है। मुझे कितने पैसे दे सकते हो, वह बता दो। मुझे फाइनल रेट बता दे। 10 मिनट लास्ट हैं, तेरे पास।