गिरोह आधार कार्ड पर नाम-पते बदलवाता था। फर्जी आईडी पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उन पर दिल्ली, हरियाणा व अन्य राज्यों से दोपहिया व चार पहिया वाहन फाइनेंस करा लेते थे।रिकवरी एजेंट दिए गए पते पर पहुंचते थे तो वह नहीं मिलते थे। इन वाहनों को वह सस्ते दामो में बेच देते थे।
कोतवाली हाथरस गेट पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड व अन्य फर्जी दस्तावेज तैयार कर दिल्ली, हरियाणा व अन्य प्रदेशों से वाहन फाइनेंस कराकर सस्ते दामों में बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर एक कार और नौ दोपहिया वाहन भी बरामद किए हैं।
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एसपी चिरंजीवनाथ सिन्हा ने बताया कि कोतवाली हाथरस गेट प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह व उनकी टीम ने चेकिंग के दौरान कृष्णा वर्मा पुत्र महेशचंद्र वर्मा निवासी बैनीगंज थाना सदर कोतवाली को लहरा चौराहे के निकट से गिरफ्तार किया। आरोपी फर्जी आईडी व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर दोपहिया व चार पहिया वाहनों को फाइनेंस कराकर बेचने वाले गिरोह का सरगना है। उसके पुलिस तीन अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है।
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एसपी के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह दिल्ली निवासी अनुज शर्मा व रोहित उर्फ राजाबाबू व मथुरा निवासी नितिन अग्रवाल के साथ मिलकर आधार कार्ड पर नाम-पते बदलवाता था। यह आरोपी अन्य लोगों की फर्जी आईडी पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उन पर दिल्ली, हरियाणा व अन्य राज्यों से दोपहिया व चार पहिया वाहन फाइनेंस करा लेते थे। जब किस्त लेने के लिए रिकवरी एजेंट दिए गए पते पर पहुंचते थे तो वह नहीं मिलते थे।
इन वाहनों को वह हाथरस व अन्य स्थानों पर लाकर आमजन को सस्ते दामो में बेच देते थे। आरोपी दो व चार पहिया वाहनों को भी दिल्ली, हरियाणा आदि स्थानों से फर्जी कागज तैयार कराकर, उनका बीमा कराकर व कुछ वाहनों को चोरी करके भी वहां से लाकर हाथरस में छिपाकर रखते हैं। इन वाहनों को अज्ञात व्यक्तियोंं को आधी कीमत में बेच देते हैं। प्राप्त रुपयों से अपना जीविकोपार्जन करते हैं।
एसपी के मुताबिक आरोपी वाहन खरीदने वालों को बताते थे कि इन गाड़ियों को बिना नंबर प्लेट के ही चलाते रहो। वह उन्हें वाहनों को सर्विस सेंटर पर न ले जाने की भी सलाह देेते थे। आरोपी ने बताया कि वह अपने तीनों साथियों के साथ मिलकर ऐसी कुछ गाड़ियों को दिल्ली से धोखाधड़ी व चोरी कर यहां लाया और इन्हें दयानतपुर नहर के पास बनी चहारदीवारी के नीचे झाड़ियों में छिपाकर रखा। यहां से एक-एक, दो-दो एक्टिवा ग्राहक मिलने पर बेचते रहते थे।