हाथरस में मलेरिया के मरीजों की संख्या पिछले दो सालों से घटने लगी है। लोगों में मलेरिया के प्रति बढ़ रही जागरूकता काम आ रही है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि वर्ष 2030 जिला मलेरिया मुक्त हो जाएगा। मलेरिया मादा मच्छर एनाफिलीज के काटने से होता है। ये गंदे पानी में पनपता है। मलेरिया में रोगी को बुखार के साथ सिर दर्द और सर्दी के लक्षण सामने आते हैं। मलेरिया चार प्रकार का होता है प्लाज्मोडियम फाल्सीफोरम, प्लाज्मोडियम विवैक्स, प्लाज्मोडियम ओवेल और प्लाजमेडियम नाउलेसी। भारत में मुख्य रूप से लोग प्लाज्मोडियम फाल्सीफोरम और प्लाज्मोडियम विवैक्स का प्रकोप रहता है।
जागरूकता से घट रहे आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2020 में मलेरिया के दस मामले सामने आए। 2021 में संख्या बढ़कर 21 हो गई। वर्ष 2022 में मलेरिया के मरीजों की संख्या घटकर पांच रह गई। लोगों को मच्छर जनित बीमारियों से जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय समय पर अभियान चलाए जाते हैं। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ी है। लोग अपने घरों व दफ्तरों के आसपास साफ सफाई रखने लगे हैं। इससे मलेरिया मच्छर नहीं पनप पाते हैं। यही कारण है कि जिले में मलेरिया के मामले घटने लगे हैं।
2030 तक मलेरिया मुक्त हो जाएगा जिला
सरकार ने जिले को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए 2030 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। सहायक मलेरिया अधिकारी श्रीकांत का दावा है कि तय समय सीमा तक लक्ष्य को पूरा कर दिया जाएगा। 2030 तक जिला मलेरिया मुक्त हो जाएगा।
हाथरस में मलेरिया के आंकड़े घटने लगे हैं। 2030 तक हाथरस जिला मलेरिया मुक्त जिला हो जाएगा। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। -श्रीकांत, सहायक मलेरिया अधिकारी हाथरस