जिले को उद्योग नगरी कहा जाता है। इसके बावजूद यहां यातायात के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। डिपो में पर्याप्त संख्या में बसें नहीं हैं। महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव नहीं है। इस कारण यहां के उद्यमियों को कारोबार की गाड़ी को सरपट दौड़ाने में चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है। बाहर से जो उद्यमी आते हैं, वह भी संसाधनों के अभाव में यहां आने से कतराते हैं। सच कहें तो परिवहन की बेहतर सुविधाओं की कमी यहां के उद्योगों की तरक्की में सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई है।
हाथरस को औद्योगिक शहर कहा जाता है। इसके बावजूद यहां यात्री और माल परिवहन की बेहतर सुविधाएं आज तक मयस्सर नहीं हैं। रेलवे यहां के कारोबारियों को पार्सल की सुविधा भी नहीं दे पा रहा है। इस कारण हाथरस और दूसरे शहरों के बीच माल का आवागमन आसपास के शहरों के माध्यम से होता है। सीधी परिवहन सेवा न होने की वजह से यहां के उद्योगों की गाड़ी सुस्ती से चल रही है।
हाथरस डिपो में पहले 78 बसें थीं। इसमें से कुछ बसें नीलामी के लिए चली गईं। इसके बाद पर्याप्त बसें नहीं मिलीं। डिपो को छह बसें ही मिली हैं। वर्तमान में 68 बसें हैं। इनमें से काफी बसें पुरानी हैं। यह भी बीच रास्ते में धोखा दे जाती हैं। इस कारण यात्रियों को बसों में धक्का भी लगाना पड़ता है। राजस्थान अन्य प्रदेशों में परमिट की बाध्यता के चलते बसों का संचालन नहीं हो रहा है। इस स्थिति में उद्यमियों को यहां मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशन पर नहीं रुकतीं महत्वपूर्ण ट्रेनें
हाथरस जंक्शन स्टेशन पर कोरोना काल से पहले महानंदा, कालका और मूरी आदि ट्रेनों का ठहराव होता था। कोरोना काल खत्म होने के बाद भी आज तक इन ट्रेनों का ठहराव दोबारा यहां शुरू नहीं किया गया है। हाथरस सिटी रेलवे स्टेशन से छपरा, गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनल आदि साप्ताहिक ट्रेनें है। इनके अलावा और कोई महत्वपूर्ण ट्रेन हाथरस के किसी स्टेशन से नहीं मिलती। इन ट्रेनों की सवारी के लिए कारोबारियों को पड़ोसी जिलों की दौड़ लगानी पड़ती है।
शहर के अंदर नहीं आतीं बसें, यात्री हो रहे परेशान
शहर के लोग इस वजह से भी परेशान रहे कि काफी रोडवेज बसें शहर के अंदर नहीं आती हैं। बाईपास से ही इन बसों का आवागमन हो रहा है। हाथरस के यात्रियों के लिए यह बड़ी समस्या है। बसों को अंदर से निकालने के लिए आए-दिन चालक-परिचालक और यात्रियों के बीच नोकझोंक होती है। यात्रियों को बसों की किल्लत का सामना करना पड़ा। सिकंदराराऊ में रोडवेज बस स्टैंड न होने से यात्रियों को बसों की सवारी के लिए जूझना पड़ता है।
बोलो उद्यमी
हाथरस से लंबी दूरी के लिए हाथरस जंक्शन से ट्रेन मिलती थीं। अब कोरोना काल से इन ट्रेनों का ठहराव बंद हो गया है। इस कारण गंतव्य की दूरी तय करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
- रूपेश गर्ग, उद्यमी
रोडवेज बसों के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। जो बसें चल रही हैं, वह भी आए-दिन बीच रास्ते में साथ छोड़ देती हैं। गंतव्य तक जाने के लिए बसों का कई घंटे इंतजार करना पड़ता है। उद्योगों की तरक्की में यह सबसे बड़ी बाधा है।
-अनिल वार्ष्णेय, उद्यमी
हाथरस डिपो की बसें रामभरोसे चल रही हैं। अन्य डिपो की बसें बाईपास से गुजर जाती हैं। इस कारण लंबे व आसपास के शहरों तक सफर करने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
-देवेंद्र गोयल, उद्यमी