एक तरफ जिले में अघोषित बिजली कटौती से हाहाकार मचा हुआ है तो दूसरी तरफ हाथरस के हक की आधी बिजली ऊर्जामंत्री के गृह जनपद को दी जा रही है, जिससे जिले के लोगों को दिन-रात बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि अफसर 15 दिन बाद आपूर्ति के हालात सुधरने का दावा निरंतर कर रहे हैं।
आगरा के 400 केवीए पीली पोखर बिजलीघर से हाथरस के 220 केवी मीतई बिजलीघर को 700 एंपियर तक लोड मिलता था, लेकिन जब से वहां क्षमता वृद्धि का कार्य शुरू हुआ है, तब से सिर्फ हाथरस को आधा यानि कि 350 एंपियर लोड ही मिल रहा था। अब इस बचे 350 एंपियर लोड में भी ऊर्जामंत्री के गृह जनपद ने सेंध लगा दी। 350 एंपियर में से करीब 200 एंपियर लोड गोकुल बिजलीघर को दिया जा रहा है।
ऐसे में पूरा जिला अब सिर्फ 150 एंपियर लोड से ही चल रहा है। इसी वजह से ट्रांसमिशन अफसरों को जिलेभर को शिफ्ट वाइज कटौती करनी पड़ रही है। कभी दो घंटे तो कभी एक घंटे की शिफ्ट में जिले के बिजलीघरों को बड़ी मुश्किल से सुचारु रखा जा रहा है। शाम सात बजे बाद से बिजली संकट चरम पर पहुंच जाता है, जिससे जिलेभर में बिजली के लिए हाहाकार मचा हुआ है। खैर बिजलीघर से भी हाथरस को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही। इस वजह से शहर से लेकर कस्बों, टीटीजेड आदि में बिजली के लिए लोग बेहद परेशान हैं। भीषण गर्मी में दिन-रात कटौती से लोगों का मूड खराब हो रहा है।