आगरा रोड पर पॉलिटेक्निक के पार्क में खिलखिला कर हंसते बुजुर्ग
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डिजिटल डिटॉक्स की जरूरत
क्लिीनिकल साइक्लॉजिस्ट डाॅ. ललित कुमार ने बताया कि हर माह डिप्रेशन के शिकार 50 से 60 मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसका कारण बढ़ता स्क्रीन टाइम व अकेलापन है। मोबाइल और इंटरनेट रिश्तों के बीच की दीवार बन गए हैं। अब डिजिटल डिटॉक्स होने की आवश्यकता है। हर शाम परिवार के लोग साथ बैठें, टीवी और मोबाइल को स्विच ऑफ कर बातें करें। इससे खोई हुई हंसी वापस आएगी।
क्या खो दिया
- दादी के चुटकुले और किस्से : इंटरनेट के दौर में बुजुर्गों का अनुभव और उनके किस्से आज की पीढ़ी को बोरिंग लगने लगे हैं।
- बच्चों की शरारत : अब बच्चे बाहर मैदान में पसीना बहाने के बजाये स्क्रीन पर वर्चुअल दुनिया में सक्रिय हैं। वास्तविक जीवन से दूर हो रहे हैं।
- संवाद की कमी : पहले दिनभर की थकान परिवार के साथ बातचीत व डिनर से दूर होती थी। अब लोग रील देखकर खुद को एंटरटेन तो कर रहे हैं, पर मानसिक सुकून गायब है।