नए हाथरस के लिए आवास विकास परिषद ने 200 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की है। इसमें से नगर पालिका परिक्षेत्र की जमीन को शामिल नहीं किया जाएगा। इसके लिए आवास विकास परिषद ने नगर पालिका से रिपोर्ट मांगी है और पूछा है कि नए हाथरस के दायरे में पालिका की कौन-कौन सी जमीन आ रही है।
आगरा-अलीगढ़ बाईपास से मथुरा-बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ते हुए करीब 200 हेक्टेयर जमीन पर यह आवासीय योजना बसाने की तैयारी है और इसे न्यू हाथरस नाम दिया जाना है। पहले करीब 100 हेक्टेयर में नया शहर बसाया जा रहा था, लखनऊ और आगरा की टीमों ने हाथरस में सर्वे कियाथा। इसके बाद इसका क्षेत्र बढ़ाने का निर्णय लिया गया था।
चयनित क्षेत्र की भूमि का डेटा नगर पालिका परिषद हाथरस को दिया गया है। इसमें सीधे तौर पर नगर पालिका से रिपोर्ट मांगी गई है कि इसमें पालिका का कितना क्षेत्र आ रहा है। आवास विकास परिषद के सहायक अभियंता गजेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि नगर पालिका की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परसीमन के बाद नगर पालिका में शामिल हो गए हैं कई गांव।
नगर पालिका का परिसीमन होने के बाद मथुरा रोड के कई गांव नगर पालिका में शामिल हो गए हैं। ऐेसे में वहां का सर्किल रेट काफी अधिक हो गया है। आवास विकास इस तथ्य को ध्यान में रखकर नगर पालिका की जमीन को छोड़कर नए हाथरस का सृजन करने की तैयारी चल रही है।
जमीन खरीद फरोख्त करने वालों का बिगड़ जाएगा गणित।
आवास विकास के इस कदम से जमीन की खरीद फरोख्त करने वालों का गणित अब बिगड़ जाएगा। आवास विकास की नई परियोजना की सुगबुगाहट से ही जमीन की खरीद फरोख्त तेज हो गई है। ऐसे में उन लोगों को झटका लग सकता है।