गोवा में जिस रात कपिल चौधरी की हत्या हुई उस रात एक हत्यारोपी ने खुद को गोवा पुलिस का टीआई पटनायक बता पिता और दोस्तों को फोन किया। उसने बताया कि कपिल वाहन चोरी में पकड़ा गया है। उसे छुड़ाने के लिए गोवा पैसे लेकर आने के लिए कहा गया।
पिता श्रीनिवास ने बताया कि रात आठ बजकर दस मिनट पर आखिरी बार बात हुई थीं, इसके बाद फोन बंद हो गया था। यह कॉल भी कपिल के मोबाइल से ही हत्यारोपी कर रहे थे। शाम सात बजे से कॉल आना शुरू हुई, जिसमें परिजनों को पता लगा कि वह किसी गिरोह के चक्कर में फंस गया है। पिता ने बताया कि उनके पास लास्ट कॉल थी, जिसमें आरोपियों ने महाराष्ट्र बॉर्डर से गाड़ी चोरी करने वाले रैकेट के पकड़ने की बात कही और कहा कि तीन गाड़ियां बरामद की गई है,चार लोगों को पकड़ा है। इनमें तुम्हारा बेटा भी शामिल है। उसे छुड़ाकर ले जाने के लिए रुपये मांगे। कॉल हिस्ट्री के आधार पर दोस्तों को भी फोन किए गए और यही बातें दोहराई गईं।
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पिता ने बताया कि उन्होंने गोवा पुलिस को सारी फोन रिकॉर्डिंग उपलब्ध करा दी हैं, जिस समय उनके बेटे से मारपीट की जा रही थी। मोबाइल नंबर भी दे दिए हैं। रिकॉर्डिंग व पकड़े गए आरोपियों के बयान से साफ है कि धोखाधड़ी व लूट करने के बाद घटना को दूसरा रूप देने की योजना थी।
बेटे के आखिरी शब्द पापा पैसे ले आओ
श्रीनिवास ने बताया कि फोन पर बेटे के आखिरी शब्द थे कि पापा पैसे ले ओ। आवाज से लग रहा था कि वह कराह रहा है और हमलावरों के आगे असमर्थ है। इसके बाद वे हेलो-हेलो करते रहे और बृहस्पतिवार रात 8.10 पर फोन कटने के बाद बंद हो गया।
कपिल के पिता श्रीनिवास ने बताया कि कपिल गोवा में जिस अंकल के परिचय में था, वे सीधे उसे नहीं जानते हैं, लेकिन जानकारी में आया है कि वह व्यक्ति बलदेव गांव धनौटी नगरिया का रहने वाला है। उसने गोवा में परिजनों की मदद करने से साफ इन्कार कर दिया,जिस वजह उस पर भी संदेह है।
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पिता के अनुसार वह वर्ष 2007-08 से गोवा में रह रहा है। प्रॉपर्टी के कार्य के संबंध में कुछ साल उनका मथुरा के बलराम से संपर्क हुआ था। अंकल इसी बलराम का चचिया ससुर है। दोस्तों ने बताया कि वह मथुरा से 27 की शाम बस से मुंबई के लिए निकला था और वहां से गोवा के लिए दूसरी बस पकड़ी थी। 29 की शाम को गोवा पहुंच गया था। रास्ते में लगातार अंकल से बात हुई थीं, लेकिन जब परिजनों ने उस नंबर पर बात की तो वह इन्कार करता रहा। बाद में स्वीकार किया कि केवल 27 अक्तूबर को उसकी बात हुई थी। श्रीनिवास ने बताया कि गोवा में अंकल ने कोई मदद नहीं की। पुलिस स्टेशन आने की बात पर गुमराह करता रहा। बाद में किसी भी मदद से साफ इंकार कर दिया, जब कि उसका घर कोलवले पुलिस स्टेशन के पास ही बताया गया था।
अभी तक तीन हुए हैं गिरफ्तार
पिता की श्रीनिवास की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात में मुकदमा दर्ज कर लिया था। इसके बाद रेंट पर कार देने वाले कैंडोलिम के गुरुदत्त लवांडे, उसके दोस्त डाइसन एग्रेलो व सूरज जोतीश ठाकुर को गिरफ्तार किया। श्रीनिवास ने बताया कि पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें दो फरार हैं। अंकल पांचों से अलग है। गोवा पुलिस को उसके बारे में बताया गया है।
पुलिस ने फोटो खींचने से रोका, वीडियो डिलीट कराई
पिता श्रीनिवास ने बताया कि बेटे का शव देखने के बाद वे काफी देर तक बदहवास थे, दूसरे दिन जब पोस्टमार्टम के लिए शव ले जाया जा रहा था तो वे एंबुलेंस में ही थे, तब फोटो व वीडियो बनाए, लेकिन पुलिस ने डिलीट करवा दिए। चोटों के निशान के फोटो नहीं लेने दिए। गोवा पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी भी परिजनों को नहीं दी है।