हाथरस। जिला क्षय रोग केंद्र पर टीबी और एचआईवी के बेहतर समन्वय को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी, लखनऊ ने गाइडलाइन जारी की हैं। इसमें टीबी मरीजों की एचआईवी के साथ-साथ ब्लड शुगर की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला क्षय रोग केंद्र पर हुई दिशा कल्स्टर टीम की बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक में एचआईवी एवं एसटीआई स्क्रीनिंग, परामर्श, परीक्षण सेवाएं, सिफलिस प्रबंधन, ईवीटीएचएस, एआरटी और टीबी-एचआईवी सह-संक्रमण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी साझा की गई।
अधिकारियों ने निर्देश दिए कि हाई-रिस्क ग्रुप और लक्षित समूहों में जांच की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि एचआईवी संक्रमितों की समय पर पहचान कर उन्हें एआरटी दवाओं से जोड़ा जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य जिले में 95-95-95 के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करना है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार भारती ने बताया कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण टीबी के मरीजों में एचआईवी संक्रमण और डायबिटीज होने का जोखिम अधिक रहता है। वर्तमान में जिले में लगभग 3,700 टीबी मरीज उपचाररत हैं। मरीजों की सुविधा के लिए ये सभी आवश्यक जांचें टीबी अस्पताल, जिला अस्पताल और सभी सीएचसी पर उपलब्ध हैं। बैठक में नाको विभाग के समस्त काउंसलर, लैब टेक्नीशियन, एसएसके टीम के साथ-साथ टीबी विभाग के एसटीएलएस, डीपीटीसी, डीपीपीएमसी एवं डीपीसी मौजूद रहे।
यह निर्देश हुए जारी
एचआईवी मरीजों की टीबी जांच : एचआईवी ग्रसित सभी व्यक्तियों को अनिवार्य रूप से टीबी की जांच के लिए संदर्भित किया जाए।
टीबी मरीजों की जांच : सरकारी अस्पतालों या निजी चिकित्सकों से इलाज करा रहे सभी टीबी मरीजों की एचआईवी और ब्लड शुगर की जांच कराना अब पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। एचआईवी जांच के लिए टीबी मरीजों को एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र (आईसीटीसी) में भेजा जाएगा।