जिला अस्पताल के दवा काउंटर पर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
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मौसम में अचानक हो रहे बदलाव, उमस और बारिश ने सेहत पर असर डाला है। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हर दूसरा मरीज खुजली, चकत्ते और लगातार छींक आने की समस्या लेकर पहुंच रहा है। जिससे एलर्जी की सबसे आम दवा लेवोसेटिरिजिन की खपत बढ़ गई है। मई में सैकड़ों मरीज लगभग 4.1 लाख गोलियां गटक गए। फरवरी के मुकाबले मई इसकी खपत चार गुना बढ़ चुकी है।
फिजिशियन डाॅ. वरुण चौधरी ने बताया कि तापमान में परिवर्तन से सर्दी-जुकाम का संक्रमण बढ़ रहा है। वायु प्रदूषण के कारण भी नाक की एलर्जी, जैसे छींक की समस्या हो रही है। बारिश व उमस में हवा में फंगस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। जब पसीना शरीर पर ज्यादा देर तक रहता है, तो यह त्वचा के संक्रमण और खुजली का रूप ले लेता है। इन्हीं से बचने के लिए लेवोसेटिरिजिन जैसी एंटी-एलर्जिक दवाओं की खपत बढ़ गई है।
चार लाख गोलियां गटक गए मरीज
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई में जिले के मरीज करीब 4.1 लाख लेवोसेटिरिजिन की गोलियां गटक चुके हैं। फरवरी में यह आंकड़ा 1.33 लाख, मार्च में दो लाख और अप्रैल में 3.61 तक था।
स्वयं दवा लेना खतरनाक
सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि लेवोसेटिरिजिन भले ही एलर्जी से तुरंत राहत देती है, लेकिन इसे बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेना चाहिए। यह केवल लक्षणों को दबाती है, बीमारी को जड़ से खत्म नहीं करती। इसके अत्यधिक सेवन से सुस्ती, सूखा मुंह या थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
संक्रमण से करें बचाव
गर्मी और उमस के मौसम में सूती और ढीले कपड़े पहने। पसीने से भीगे कपड़ों को तुरंत बदलें। कम से कम दो बार नहाएं और एंटी-फंगल पाउडर का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर करें। जिन्हें लगातार छींक आने की समस्या है, वे धूल और धूप से बचने के लिए बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें। ठंडे पानी, ठंडे पेय और आइसक्रीम के सेवन से बचें।