महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते खतरे को देखते हुए जल्द ही टीकाकरण कार्यक्रम में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन को शामिल किया जा सकता है। फिलहाल यह वैक्सीन बाजार में उपलब्ध है, जिसकी कीमत तीन से चार हजार रुपये है। हाल ही में कैंप के जरिये 14 से 15 वर्ष की 98 किशोरियों को वैक्सीन लगाई गई थी।
भारत में महिलाओं के बीच सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार जल्द ही एचपीवी वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर सकती है। टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद यह वैक्सीन सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध होगी, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डाॅ. एमआई आलम ने बताया कि नौ से 15 वर्ष की आयु में यह वैक्सीन दी जा सकती है, लेकिन फिलहाल विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 14 से 15 वर्ष की ही किशोरियों को यह वैक्सीन लगाने की सिफारिश की है। उन्होंने बताया कि इसी उम्र में टीकाकरण सबसे अधिक प्रभावी होता है। यह भविष्य में संक्रमण के खतरे को लगभग 90 फीसदी तक कम कर देता है।
98 किशोरियों का हुआ टीकाकरण
वैक्सीन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 29 नवंबर को एक विशेष टीकाकरण शिविर टुकसान के कस्तूरबा गांधी विद्यालय में लगाया गया था। मंडलायुक्त की पहल पर समाजसेवियों से 100 इंजेक्शन स्वास्थ्य विभाग को मिले थे। इनमें से 98 किशोरियों को वैक्सीन लगाई गई थी।
इनका कहना है
सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण एचपीवी संक्रमण है। इसके लिए वैक्सीन आ चुकी है, लेकिन यह फिलहाल बाजार में उपलब्ध है। जल्द ही टीकाकरण में इसे शामिल किया जा सकता है, जिससे सभी किशोरियों को इसका लाभ मिल सकेगा।
डाॅ. राजीव रॉय, सीएमओ