नगर के राजकीय आयुर्वेद व होम्योपैथी चिकित्सालय पिछले चार दिनों से अंधेरे में हैं। बिजली खराब हो चुकी है। सर्दी की वजह से स्टाफ को भी बिजली की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही। दोनों केंद्रों पर आने वाले गिने-चुने मरीजों को अंधेरे में ही दवा लिखकर टरकाया जा रहा है।
दोपहर दो बजे तक ये केंद्र खुलते हैं, इसलिए स्टाफ बिजली ठीक कराने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। मंगलवार को अंधेरे के कारण यहां उपचार कराने आने वालीं महिला मरीज असहज दिखाई दीं।
जिला अस्पताल परिसर में राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय व होम्योपैथी चिकित्सालय अलग-थलग पड़े हैं। अस्पताल की इमारत में इनके लिए जगह नहीं है, इसलिए रोटरी क्लब के 1975 में बने छायावास में ये दोनों अस्पताल चल रहे हैं।
आयुर्वेद चिकित्सालय पर एक कमरा तथा एक ही कमरा होम्योपैथी विभाग पर है। नगर के इन दोनों ही अस्पतालों के निर्माण के लिए पिछले 27 सालों से भूमि ही नहीं मिल सकी है। प्रशासन को कई बार जमीन उपलब्ध कराने के लिए लिखा जा चुका है, लेकिन जमीन उपलब्ध कराने के लिए कवायद ही नहीं हुई।
जिला महिला अस्पताल की इमारत से एक केबल के जरिये दोनों चिकित्सा केंद्रों को बिजली दी जा रही है। स्टाफ के अनुसार बंदरों की उछलकूद से शनिवार की सुबह केबल में फॉल्ट हुआ था, जिसके बाद से बिजली सही नहीं हो सकी। सोमवार को भी मरीजों को अंधेरे में देखा गया। मंगलवार को भी यही स्थिति रही।
आयुर्वेद चिकित्सालय पर एक चिकित्सक हैं और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। यही स्थिति होम्योपैथी चिकित्सालय की है। यहां एक फार्मासिस्ट हैं। चिकित्सक रोस्टर पर आते हैं। यही भी एक वजह है कि चिकित्सा कार्य से अतिरिक्त कोई काम कराने के लिए समय स्टाफ पर नहीं है।
नहीं आ पाते मरीज
जर्जर भवन व संसाधनों के अभाव के कारण ही आयुर्वेद व होम्योपैथी चिकित्सा का लाभ हर व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा। एक कौने में बने होने के कारण जिला अस्पताल आने वाले अधिकतर मरीजों को इन चिकित्सालयों की जानकारी ही नहीं। आयुर्वेद अस्पताल में मंगलवार को 24 व होम्योपैथी चिकित्सालय में मात्र 56 मरीज ही आए।
जुकाम व छाती में दर्द की परेशानी है, इसलिए जिला अस्पताल आए हैं। हमें पता नहीं कि यहां आयुर्वेद या होम्योपैथी का अस्पताल भी है।
-बालकिशन निवासी भोजगढ़ी, सासनी
काफी समय से सांस लेने में दिक्कत है। अब छाती भी जकड़ गई है। आयुर्वेद की दवाओं के बारे में काफी सुना है, लेकिन अस्पताल देखकर लगता ही नहीं कि यहां उपचार हो सकता है।
-रामस्वरूप निवासी रति का नगला
पिछले सप्ताह बिजली खराब हुई थी, जिसे ठीक करा दिया गया था। अब फिर से दिक्कत आ गई है। बिजली ठीक कराने के लिए स्टाफ को निर्देशित किया गया है।
अशोक कुमार चौहान, डीएचओ