उपचार की राह देखता टीबी रोगी अस्पताल के बाहर बेंच पर पड़ा हुआ है और साथ में मौजूद तीमारदार। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
जिले के टीबी अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाए जाने से टीबी के मरीजों का बुरा हाल है। हॉस्पिटल के मैन गेट के सामने खुले आसमान के नीचे तपती धूप में आखिरी सांस गिनते टीबी रोग से ग्रस्त पिता को लेकर बेटी व बेट उसको उपचार, भर्ती करने के लिए इधर उधर भटकते देखे गए।
सोमवार को टीबी से ग्रसित थाना हसायान क्षेत्र के गांव सीचावली सानी निवासी वृद्ध हरपाल की तबीयत बिगड़ने पर परिजन हसायान ले गए। वहां से उसकी हालत अत्यधिक खराब होने के कारण हाथरस रेफर कर दिया गया।
मरीज को बेटी कमला देवी और बेटा विश्वेंद्र कुमार 108 एंबुलेंस से हाथरस लेकर आए। वह मरीज को लेकर घंटों घूमते रहे, उसको जिला अस्पताल से टीबी हॉस्पिटल भेज दिया, लेकिन यहां भी उसको भर्ती नहीं किया तो एंबुलेंस वाले ने मरीज को उतार दिया। हार थक कर टीबी हॉस्पिटल के मैन गेट के सामने बने पक्के बेंच पर पिता को रख कर खराब स्वास्थ्य महकमे को कोसते भाई-बहन नजर आए।
- टीबी के मरीजों को उपचार मिल रहा है। टीबी अस्पताल को कोविड अस्पताल बना दिया गया है। इसलिए यहां पर टीबी के मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में शासन को भी पत्र भेजा गया है। अभी मैं अवकाश पर चल रहा हूं। जिला अस्पताल में ऐसे रोगियों को भर्ती कराए जाने की व्यवस्था पहले बनाई गई थी। - डॉ. एएस वशिष्ठ, जिला क्षय रोग अधिकारी