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हॉपर-चेंपा चाट रहे आम की फसल

Mon, 18 Apr 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिकंदराराऊ
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अाम - फोटो : अमर उजाला
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राकेश वार्ष्णेय
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सिकंदराराऊ। बौर से लदे पेड़ों को देखकर आम की बेहतर फसल की उम्मीद पाले बैठे किसानों को कुदरत ने तगड़ा झटका दिया है। सिकंदराराऊ के कई इलाकों में हॉपर कीट और चेंपा की बीमारी का प्रकोप लग गया है, जिससे आम की साठ फीसदी फसल बर्बाद हो गई है।

लंगड़ा और चौसा आम की प्रजाति इस कीट की सबसे ज्यादा शिकार बनी है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि बागों में 60 फीसदी कच्चे आम गिर चुके हैं। बगान मालिक बड़ी मात्रा में पेस्टीसाइड लगा चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला है।
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क्षेत्र में आम के बाग बहुतायत में होने के कारण आम की फसल मुनाफे की फसल मानी जाती है। प्रारंभ में तो सबकुछ ठीक रहा, लेकिन अमिया निकलने के पश्चात आम की बौर की डाली के किनारे पर हॉपर कीट प्रजाति पनप गई। फसल इतनी कमजोर हो चुकी है कि हल्की-फुल्की आंधी में भी यह पूरी तरह झड़ जाएगी और बागवानों को काफी नुकसान झेलना होगा।

15 दिन में फसल पर छा गया कीट
यह कीट पत्ते को खाकर उस पर मल मूत्र करता है, जोकि चिपचिपा पदार्थ बन जाता है और धूप में चमकता है। इसी पदार्थ में अंडों से और ज्यादा कीट पनप जाते हैं और बौर का पूरा रस चूसने लगते हैं, जिससे अमिया को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता है। वह कमजोर होकर पेड़ से टूटकर गिरने लगती है। लगभग 15 दिन से कीट का प्रभाव पेड़ों पर पूरी तरह नजर आ रहा है। इस कीट ने आम की लंगड़ा और चौंसा किस्म को ज्यादा बर्बाद किया है। इस बीमारी से निजात पाने के लिए बाजार में प्रचलित अनेक प्रकार की कीमती पेस्टीसाईड का छिड़काव से बागों को कई मर्तबा धो चुके हैं, लेकिन चेंपा से निजात नहीं मिली है।

2006 के बाद लगी बीमारी
बाग मालिक इकराम कुरैशी का कहना है कि 2006 के 10 वर्ष पश्चात हॉपर कीट की उत्पत्ति से चेंपा की बीमारी हुई है। आम के बागों के स्वामियों को कम फसल के कारण भारी क्षति की आशंका है।

सर्दी-गर्मी से पैदा हुआ हॉपर
बाग मालिक प्रेमप्रकाश सिंह पुंढीर का कहना है कि रात में मौसम सर्द और दिन में गर्म रहने के कारण यह कीट पैदा हुआ है। एक बार अगर यह बौर के किनारे लग जाए तो पूरा आम खत्म कर देता है।
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-हॉपर कीट और चेंपा रोग से निपटने के लिए मॉनो प्रोटोकॉस और यूनालफॉस दवाएं आती हैं, जो दोनों में से एक-एक एमएल पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से रोग नष्ट हो जाएगा। यह दवा चिपकी रहे इसके लिए टी. कॉस और टीनो कॉस भी एक एमएल प्रति लीटर के हिसाब से मिला लें। छिड़काव शाम को करें, जिससे रोग से मुक्ति मिल जाएगी।
-डॉ.श्यौराज सिंह, कृषि वैज्ञानिक
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