कमल वार्ष्णेय
हाथरस। मुरसान ब्लॉक के गांव वाद नगला अठवरिया की प्रेमवती ने चौका-चूल्हा के साथ न सिर्फ पति के साथ खेती संभाली, बल्कि शहद का कारोबार कर अपनी जिंदगी में तरक्की की मिठास भी घोली। पिछले पांच साल में वह अपने उत्पादों को गांव से निकालकर विकसित शहरों तक पहुंचा चुकी हैं।
हाल ही में 25 से 29 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में हुए चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में भी वे अपना स्टॉल लगा चुकी हैं। वहां उन्होंने गुरुग्राम के एक मॉल के साथ एमओयू भी साइन किया है।
प्रेमवती ने वर्ष 2021 में स्वयं सहायता समूह के जरिये व्यापार की शुरुआत की थी। उन्होंने मधुमक्खी पालन शुरू किया और खुद आत्मनिर्भर बनीं। यही नहीं इन पांच सालों में वे अब तक करीब 70 से अधिक महिलाओं को समूह के जरिये शहद के व्यापार से जोड़कर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं।
स्टॉल से की शुरूआत
प्रेमवती ने जब यह व्यापार शुरू किया, तब उनके पास मार्केटिंग का कोई साधन नहीं था। बोतलों में शहद भरकर गांव के बाहर बाईपास पर ही स्टॉल लगाकर बेचना शुरू किया। शुरुआत धीमी रही, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने मेलों में स्टॉल लगाना शुरू किया। प्रेमवती ने बताया कि अब उनके स्थायी ग्राहक बन चुके हैं, लेकिन वे हाईवे पर स्टॉल आज भी लगाती हैं। संवाद
विशिष्ट प्रकार के शहद से बनाई पहचान
प्रेमवती ने अपनी पहचान विशिष्ट प्रकार के शहद से बनाई है। ट्रेड फेयर में भी कंपनियों को उनके द्वारा निर्मित शहद की वैरायटी पसंद आईं। प्रेमवती के अनुसार वे माइग्रेशन तकनीक के जरिये लीची, जामुन, बेर और बबूल/कीकर का सिंगल-फ्लोरा शहद तैयार करती हैं। मधुमक्खियों के बक्सों को मौसम के अनुसार ऐसे अलग-अलग इलाकों में ले जाते हैं, जहां इन पेड़ों के बाग या जंगल होते हैं। इसके लिए क्षेत्रों को पहले ही चिह्नित कर लिया जाता है।
बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का सपनाप्रेमवती की 16 वर्ष की बेटी और 15 वर्ष का बेटा। उनका प्रयास है कि दोनों बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण करें। इसके लिए वे बच्चों को समय देने के साथ ही परिवार के सदस्यों की हर जरूरत का ख्याल रखती हैं। उनके पति चतुर्भुज भी इस दोहरी जिम्मेदारी के निर्वहन में उनकी पूरी मदद करते हैं।