मंडी समिति में आढ़त पर होती गेहूं की तौल। संवाद
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मौसम के बाद बेहाल किसानों के जख्मों पर अब सिस्टम की बेरुखी नमक छिड़क रही है। क्रय केंद्रों पर गेहूं में नमी बातकर किसानों को लौटाया जा रहा है। मंडी में इस गेहूं को 200 रुपये कम का भाव दिया जा रहा है। सीजन में अब तक जिले की मंडियों में 150 किसानों से 15,250 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है, यानी अभी तक किसानों को एमएसपी के मुकाबले लगभग 30.50 लाख रुपये का घाटा हो चुका है।
जिले में इस बार लगभग 75 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई थी। किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन बेमौसम बारिश ने गेहूं की गुणवत्ता और चमक प्रभावित कर दी। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन वहां नमी और मानकों का हवाला देकर किसानों को लौटाया जा रहा है। मजबूरी किसान मंडियों का रुख कर रहे हैं तो वहां उन्हें 2250 से 2325 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। सीजन की शुरूआत से ही लगभग यही भाव चल रहा है।
-बारिश के कारण गेहूं में नमी आ गई है। सरकारी केंद्रों पर चक्कर काटने के बाद भी जब खरीद नहीं हुई, तो घर में रखी फसल को खराब होने से बचाने के लिए कम दाम पर आढ़तियों को बेचना पड़ा।
सुनील चौधरी, शहवाजपुर हसायन,
एक तरफ फसल की बर्बादी और दूसरी तरफ बाजार में मिल रहे कम दाम ने कमर तोड़ दी है। प्रति क्विंटल 200 रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है।
विनय कुमार, नगला गढू, सासनी।
चमक में छूट के लिए रिपोर्ट भेजी गई है। शासन स्तर से आदेश का इंतजार है। क्रय केंद्रों पर खरीद कराई जा रही है।
कमला प्रसाद यादव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।