दूध उत्पादन में अग्रणी जनपदों में शुमार हाथरस अब अपनी रबड़ी के लिए भी देशभर में खास पहचान बना रहा है। एक जनपद-एक व्यंजन योजना के अंतर्गत इसका चयन होने के बाद इस कारोबार को और प्रोत्साहन मिला है। यहां की रबड़ी अब उत्तर प्रदेश की सीमाओं से निकलकर दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा तक पहुंच रही है।
हाथरस की रबड़ी अपनी पारंपरिक विधि, गाढ़ेपन, लाजवाब स्वाद और गुणवत्ता के कारण लोगों की पहली पसंद है। शहर में मिठाई की दुकानों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर इसका निर्माण किया जाता है। विवाह समारोहों, धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के अलावा सामान्य दिनों में भी इसकी बहुत मांग रहती है।
शहर के एक प्रमुख रबड़ी व्यवसायी हरीमोहन हन्नो का कहना है कि हाथरस की रबड़ी की मांग लगातार बढ़ रही है। पहले इसकी बिक्री मुख्य रूप से आसपास के जनपदों तक सीमित थी, लेकिन अब दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर और अन्य शहरों से भी बड़ी मात्रा में ऑर्डर मिल रहे हैं।
त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में मांग कई गुना बढ़ जाती है। एक अन्य मिठाई कारोबारी ने बताया कि ओडी-ओसी योजना में शामिल होने के बाद हाथरस की रबड़ी को नई पहचान मिली है।
इससे छोटे कारोबारियों को भी फायदा हुआ है और उनकी रबड़ी भी बड़े बाजारों तक पहुंच रही है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। कारोबारियों का कहना है कि जिले में हो रहा बेहतरीन दूध उत्पादन ही रबड़ी उद्योग की सबसे बड़ी ताकत है। गुणवत्तापूर्ण दूध उपलब्ध होने के कारण यहां तैयार होने वाली रबड़ी का स्वाद और गुणवत्ता अन्य क्षेत्रों से अलग पहचान रखती है।
मांग से अधिक है दूध उत्पादन
आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 4.52 लाख दुधारू पशु हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 22.5 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। यह उत्पादन न केवल जिले की जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि डेयरी और मिठाई उद्योग को भी मजबूती प्रदान करता है।
जिले में प्रतिदिन लगभग 7.5 लाख लीटर दूध की फुटकर बिक्री होती है, जबकि करीब आठ लाख लीटर दूध विभिन्न डेयरी कंपनियों को आपूर्ति किया जाता है। शेष दूध का उपयोग घी, खोया, पनीर और रबड़ी जैसे दुग्ध उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
ब्रांडिंग हो तो मिले राष्ट्रीय पहचान
डेयरी और मिठाई कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर और अधिक ध्यान दिया जाए तो हाथरस की रबड़ी राष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी पहचान बना सकती है। दूध उत्पादन और पारंपरिक मिठाई उद्योग का यह संगम जिले की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर सकता है।
कारोबारियों का कहना है कि हाथरस की रबड़ी को चाहने वाले विदेशों में भी मौजूद हैं, लेकिन रबड़ी अधिक समय तक रखी नहीं जा सकती, इसलिए वहां भेजना फिलहाल संभव नहीं है।