न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिला पंचायत अध्यक्ष का पद पाने की चाहत रखने वाले प्रत्याशियों को इस बार डबल धमाल करना होगा। पहले तो उन्हें सदस्य पद का चुनाव जीतकर जनता में अपनी पकड़ साबित करनी होगी और उसके बाद उन्हें जिला पंचायत में अपना बहुमत साबित करना होगा। तभी वह इस पद तक पहुंच पाएंगे।
जिला पंचायत के कई वार्डों में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प है। इन्हीं वार्डों में से जीता हुआ सदस्य आगे अध्यक्ष की कुर्सी का दावेदार बनेगा। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने अधिकृत प्रत्याशी तो मैदान में नहीं उतारे, लेकिन उन्हें समर्थन जरूर दिया है। वहीं जिले के कुछ बड़े राजनेता व उनके परिजन भी चुनाव लड़ रहे हैं। इनका मकसद ही जिला पंचायत की कुर्सी हासिल करना है।
ऐसे में इन प्रत्याशियों को सबसे पहले जनता की कसौटी पर खरा उतरना होगा। पहले इन्हें जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतना होगा। तब यह अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी कर सकेंगे। अध्यक्ष पद के दावेदारों ने चुनाव से पहले अपनी पूरी रणनीति तय कर ली है। वार्ड की स्थिति देखी और यह देखा कि किस वार्ड से वह मजबूती से चुनाव लड़ सकते हैं।
तदुपरांत उन्होंने वहां से नामांकन किया और चुनाव मैदान में उतरे। अपने कुछ समर्थकों को भी चुनाव मैदान में उतारा। उनका खर्चा भी इन प्रत्याशियों ने उठाया। इसका मकसद भी यही है कि उनके साथ उनके समर्थक प्रत्याशी भी जीत जाएं, जिससे जब अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हों तो उन्हें ज्यादा सदस्य अपने पक्ष में न तोड़ने पड़ें। मतदान होने तक यह बड़े नेता इसी रणनीति में लगे रहे। बृहस्पतिवार को मतदान हो जाएगा।
अध्यक्ष बनने की चाह रखने वाले नेताओं के सामने दोहरी चुनौती होगी। पहली यह कि वह अपने क्षेत्र में विजयश्री हासिल कर सकें, जोकि जनता के माध्यम से उन्हें मिलनी है। दूसरी उसके बाद यह कि वह अपने पक्ष में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बहुमत जुटा सकें। मतदान होने पर अध्यक्ष पद के जो दावेदार इस पद को पाने के लिए जिला पंचायत सदस्य के रूप में मैदान में उतरे हैं, उनकी रणनीति यह भी रही कि अध्यक्ष पद के लिए भविष्य में जो संभावित दावेदार उनके सामने होगा, उसे सदस्य ही न चुनकर आने दिया जाए। इसके लिए भी रणनीति अपनाई गई। दलीय निष्ठाएं इस चुनाव में ताक पर रख दी गईं और दुश्मन के दुश्मन दोस्त भी हो गए।