हाथरस : मंडी में बिकने को लगा सरसों का ढेर। संवाद
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
इस बार सरसों की फसल का उत्पादन करने वाले किसानों की बल्ले बल्ले हो गई है। इस साल फरवरी माह में पिछले साल की तुलना में सरसों के दाम में दो से ढाई हजार रुपये क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। फसल का वाजिब मूल्य मिलने से किसानों के चेहरे पर खुशी नजर आ रही है। मंडी प्रशासन भी राजस्व बढ़ने की संभावना से उत्साहित है।
उल्लेखनीय है कि जिले में आलू व गेहूं की सर्वाधिक पैदावार होती है। इस बार खेतों में सरसों की फसल भी खूब लहलहा रही है। किसान अपनी उपज को लेकर मंडी का रुख करने लगे हैं। सरसों पांच से साढ़े छह हजार रुपये तक दाम पहुंच गए हैं। किसानों की सरसों को आढ़तिया खुद प्लेटफार्म पर रखकर सुखा रहे हैं। सरसों के दामों में आए इस उछाल से आने वाले दिनों में सरसों के तेल के दामों में भी तेजी आने की संभावना मंडी में जताई जा रही है। इस कारण आमजन की जेब पर महंगाई का बोझ बढ़ना तय है।
बारिश से भीगी सरसों को सुखा रहे अन्नदाता
हाथरस। इस बार वसंत पंचमी से ऋतु परिवर्तन हो गया। इसके साथ सरसों पर फूल आना शुरू हो गया। इस दौरान बारिश ने दस्तक दे दी है, जिससे जिले के अधिकांश किसानों की सरसों भीग गई। अब किसान सरसों को सुखाकर मंडी ला रहे हैं। बीते दिनों हुई बारिश ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है। संवाद
इस बार पिछले साल की तुलना में सरसों का दाम अच्छा है। इस बार सरसों की पैदावार कम रही है। इस कारण ज्यादा फायदा नहीं हो रहा है।
-सुल्तान सिंह, किसान
पिछले वर्ष फरवरी में सरसों का दाम 45 सौ रुपये क्विंटल था। इस बार शुरुआत में रेट सही है। आने वाले दिनों में रेट में और उछाल आने की संभावना है।
-अमिताभ, किसान