न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पांच अगस्त को भूमि पूजन की ईंट रखते ही आंदोलन से जुड़े सादाबाद के कारसेवक भी भावुक हो गए। कार सेवकों का कहना है कि उनकी वर्षों की तपस्या सफल हो गई।
कार सेवा में भागीदार रहे सादाबाद के चेयरमैन रविकांत अग्रवाल और भाजपा प्रवक्ता सुधीर गर्ग ने बताया कि उनके परिवार शुरू से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और उनके परिवार के लोगों ने आपातकाल का दंश भी सहा है। इन लोगों की एक टीम थी, जो अभी भी राष्ट्र कार्य में तत्पर रहती है। यह टीम पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण शुरू से ही जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ गई। 1984 से लेकर 1992 तक ढांचा विध्वंस तक यह टीम हर जगह मौजूद रही। चाहे वो 1989 का शिलान्यास हो, शिला पूजन या चरणपादुका पूजन हो।
1990 की कारसेवा को याद करते हुए इन लोगों ने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर टीम में शामिल रविकांत अग्रवाल, तत्कालीन बजरंग दल के तहसील संयोजक सुधीर गर्ग के अलावा, विनोद अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, किशोर जैसवाल, अनिल गोयल आदि लोग शामिल थे। गांव-गांव श्रीराम ज्योति लेकर जाते और भजन-कीर्तन, नुक्कड़ नाटक, नुक्कड़ सभा के माध्यम से जन जागरण करते। मशाल जुलूस, साइकिल यात्रा में काफी संख्या में लोग जुटने लगे तो तब की पुलिस की निगाह में ये लोग खटकने लगे। आगे-आगे माधव शरण गोयल, सुखदेव बिरला, केशवदेव शर्मा, रामदत्त मिश्रा आदि के नेतृत्व में यह युवा टीम और पीछे-पीछे सादाबाद पुलिस का अमला। लुका छिपी के इस खेल में बाजी कारसेवकों के हाथ रहती।
30 नवंबर को होने वाली कारसेवा के लिए अयोध्या जाने के प्रयास में रविकांत अग्रवाल, सुधीर गर्ग, किशोर जैसवाल, विनोद अग्रवाल, अनिल गोयल, प्रदीप अग्रवाल और सुखदेव बिरला पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए और इन्हें एटा जिला जेल भेज दिया गया। इनके बीच से किसी तरह बचते बचाते दो लोग विपिन बिहारी एडवोकेट ओर सुनील जिंदल अयोध्या पहुंच गए, जो कारसेवा में गोली लगने से घायल हो गए। इन दोनों के अयोध्या पहुंचने और 30 अक्तूबर और दो नवंबर को अयोध्या नरसंहार का समाचार सुनकर सादाबाद में भी सन्नाटा पसर गया, लेकिन ये दोनों लोग सकुशल वापस आ गए।
एटा जेल से छूटने के बाद ये सब लोग तीन जनवरी को दो बसों में भरकर अयोध्या पहुंचे और वहां अपनी गिरफ्तारी दी। अनवरत चल रहे आंदोलन में सक्रिय रहे ये लोग छह दिसंबर 1992 की कारसेवा के लिए अयोध्या पहुंचे। पांच अगस्त को यह टीम फिर एकजुट हुई और भूमि पूजन के साथ सभी वास्तविक कारसेवकों के अभिनंदन के साथ अपने आंदोलन की परिणति को फलीभूत होते देखा। प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मिष्ठान्न वितरण किया और जल्दी ही अयोध्या जाने का संकल्प व्यक्त किया।